सीरिया में हुए केमिकल अटैक की घटनाओं के पीछे का सच
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कुछ दिन पहले इदलिब शहर में हुए केमिकल हमले को मुद्दा बना के आख़िरकार अमेरिका ने सीरियन सैन्य प्रतिष्ठानों को सीधे तौर पर निशाना बनाना शुरू कर ही दिया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr ०७, २०१७ १२:५१ Asia/Kolkata
  • सीरिया में हुए केमिकल अटैक की घटनाओं के पीछे का सच

कुछ दिन पहले इदलिब शहर में हुए केमिकल हमले को मुद्दा बना के आख़िरकार अमेरिका ने सीरियन सैन्य प्रतिष्ठानों को सीधे तौर पर निशाना बनाना शुरू कर ही दिया।

होम्स में एक सैन्य हवाई अड्डे पर 59 क्रूज़ मिज़ाइलें अमेरिकी नौसेना द्वारा दाग़ी गयी हैं। इस हमले के कुछ देर ही बाद दाइश के आतंकवादियों ने सैन्य अड्डे के आसपास की सीरियन फौज की पोस्टों पर हमला शुरू कर दिया। तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है क्या हर मोर्चे पर शिकस्त खा रहे आतंकवादियों की मदद करने के लिए ये हमला किया गया है?


2013 में भी अमेरिका ने गोता शहर में हुए केमिकल हमलों का झूठा आरोप सीरियन सरकार पर लगा के सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप की कोशिश की लेकिन रूस ने समय रहते हुए मधस्यता करते हुए अमेरिकी हमलों को रोक दिया था। बाद में गोता में हुए केमिकल हमलों की जांच में सऊदी इंटेलिजेंस और सऊदी समर्थित विद्रोहियों के शामिल होने की बात सामने आयी थी।

अमेरिका के नेशनल ग्राउंड इंटेलिजेंस सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार गोता में हुए केमिकल हमले में इस्तेमाल की गयी सरीन गैस को आतंकवादी संगठन अल-क़ाएदा द्वारा इराक़ में बनाया गया था और तुर्की के माध्यम से सीरिया में पहुँचाया गया और वहां सऊदी इंटेलिजेंस की मदद से नुस्रा फ्रंट के आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया।

ब्रिटेन की डिफेन्स साइंस टेक्नोलॉजी लेबोरेटरी की रिपोर्ट के अनुसार गोता शहर में इस्तेमाल की गयी सरीन गैस किचन ग्रेड की थी और सैन्य ग्रेड की नहीं थी जो सेनाओं द्वारा विकसित की जाती है। बेल्जियन लेखक "पिअर पिक्सीनीं दा प्रता" के अनुसार जब आतंकवादियों ने उनका अपरहण कर लिया था तो कई बार उन्होंने आतंकियों को ये बात क़बूल करते सुना था कि गोता में केमिकल अटैक उन्होंने ही किया था। कुल मिलाकर गोता केमिकल अटैक के बाद अमेरिका द्वारा सीरियन सरकार पर लगाये गए सभी आरोप जांच के बाद झूठे साबित हुए।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस तरीक़े से अमेरिका इस नतीजे पर इतनी जल्दी पहुँच जाता है कि ये हमले सीरियन सेना ने ही किये हैं? इन नतीजों पर पहुँचने के पीछे जानकारी के दो स्त्रोत बताये जाते हैं, एक सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स और दूसरा वाइट हेल्मेट्स संगठन। ये दोनों ही संगठन पश्चिमी देशों की एजेंसियों द्वारा फंड किये जाते हैं।

सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स का प्रमुख एक सीरियन है जो पिछले लंबे समय से ब्रिटेन में रहता है और हमेशा ये कहता है कि उसे सीरिया में मौजूद अपने सूत्रों से जानकारियां मिलती हैं लेकिन आजतक वो यह नहीं बता पाया कि आख़िर उसके ये गुमनाम सूत्र हैं कौन। वाइट हेल्मेट्स संगठन को बनाने में एक पूर्व ब्रिटिश फौजी की अहम भूमिका रही है और ब्रिटेन से ही इस संगठन को आर्थिक मदद मिलती है।

तो अब सवाल यह उठता है कि किस तरीक़े से इन दोनों संगठनों की बातों पर विश्वास किया जाये? जिस तरीक़े से गोता में हुए केमिकल हमलों की जांच के बाद ये स्पष्ट हो गया था कि उन हमलों में सीरियन फौज का कोई भी हाथ नहीं था, अगर उसी तरीक़े से इदलिब में हुए केमिकल अटैक में जाँच के बाद अगर ये ही नतीजा दोबारा आता है कि ये हमला भी आतंकियों ने ही किया है तो क्या सीरियन फौज पर अमेरिकी नौसेना द्वारा किये गए इस हमले के लिए अमेरिका माफ़ी मांगेगा?

अन्य ध्यान देने योग्य बात ये भी है कि 2013 के गोता केमिकल हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जब सीरियन सरकार के कब्ज़े वाले केमिकल हथियारों को नष्ट करवा दिया गया था तो अब इदलिब में सीरियन आर्मी केमिकल हमला कर कैसे सकती है? जब सीरियन आर्मी के पास अब केमिकल हथियार हैं ही नहीं तो वो केमिकल हमला कर कैसे सकती है? अब समय आ गया है जब पूरे विश्व के अमनपसंद लोगों को एक हो के इस अमेरिकी हमले का विरोध करना चाहिए अन्यथा एक और देश अमेरिकी साम्राज्य की भूख का शिकार बन जायेगा।

 

 

                    (लेखकः अभिमन्यु_कोहाड़)

(नोटः लेखक के निजी विचार से पार्स टूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं।)