मिस्र में सज़ाए में वृद्धि पर दुनिया चिंतित
मिस्र की दसियों महत्वपूर्ण हस्तियों ने नागरिकों को सुनाई मौत की सज़ा की निंदा की है।
मिस्र की लगभग 80 महत्वपूर्ण हस्तियों ने एक बयान जारी करके नागरिकों को सुनाई गयी मौत की सज़ा की आलोचना की है और कहा है कि मिस्र न्यायाधीशों के हाथों देश के नागरिकों के ग़ैर क़ानूनी जनसंहार के मंच में परिवर्तित हो गया है।
यह एेसी स्थिति में है कि मिस्र की राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद ने स्थाई गिरफ़्तार की समयावधि कम करने की मांग की है। मिस्र की राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद ने घोषणा की है कि जेलों में क्षमता से तीन गुना अधिक क़ैदियों को हिरासत में रखा गया है। इस परिषद ने हिरासत में रखे गये लोगों की अवधि कम करने की भी मांग की है। अस्थाई हिरासत में रखे जाने की अवधि 24 साल है।
मिस्र में अब्दुल फ़त्ताह सीसी के सत्ता में पहुंचने के बाद से मुस्लिम ब्रदरहुड्स के बहुत से समर्थकों और सदस्यों को न्यायालय ने या तो कारावास की सज़ा सुनाई है या तो मृत्युदंड दिया है। यह एेसी स्थिति में है कि विश्व समुदाय राजनैतिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों के विरुद्ध सज़ाओं के आदेश को रोकने और राजनैतिक गिरफ़्तारियों को समाप्त करने की निरंतर मांग कर रहे हैं।
मिस्र में जब से सेना द्वारा मुहम्मद मुस्री को अपदस्थ किया गया और अब्दुल फ़त्ताह सीसी सत्ता में आए हैं तब से मिस्री सेना 30 हज़ार से अधिक राजनैतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर चुकी है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी मिस्र में विरोधियों के विरुद्ध इस प्रकार की सज़ाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे वर्तमान इतिहास में अभूतपूर्व बताया है।
मानवाधिकार की अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी अब्दुल फ़त्ताह सीसी की सरकार को हुस्नी मुबारक की सरकार से अधिक दमनकारी सरकार बताया है जबकि मुर्सी के समर्थक सीसी को विद्रोही नेता कहते हैं जिन्होंने वर्ष 2012 के राष्ट्रपति चुनाव की अनदेखी करते हुए क़ानूनी राष्ट्रपति को अपदस्थ कर दिया। (AK)