शैख़ ईसा क़ासिम का समर्थन, धार्मिक दायित्व हैः14 फरवरी युवा क्रांति
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बहरैन की 14 फरवरी युवा क्रांति और इस देश के धर्मगुरूओं ने शैख ईसा कासिम का जो समर्थन किया है वह एक बार फिर आले खलीफा की तानाशाही सरकार को पीछे हटने पर बाध्य कर देगा और वह तानाशाही सरकार को शैख ईसा के अपमान की अनुमति नहीं देगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०४, २०१७ १५:४९ Asia/Kolkata

बहरैन की 14 फरवरी युवा क्रांति और इस देश के धर्मगुरूओं ने शैख ईसा कासिम का जो समर्थन किया है वह एक बार फिर आले खलीफा की तानाशाही सरकार को पीछे हटने पर बाध्य कर देगा और वह तानाशाही सरकार को शैख ईसा के अपमान की अनुमति नहीं देगा।

बहरैन की 14 फरवरी युवा क्रांति और इस देश के धर्मगुरूओं ने अलग 2 विज्ञप्ति जारी करके इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरू शैख ईसा क़ासिम के विरुद्ध हर प्रकार के संभावित आदेश का मुकाबला किये जाने को अनिवार्य करार दिया है।

बहरैन की तानाशाही शासन के निर्देशन में काम करने वाली एक अदालत सात मई वर्ष 2017 को शैख ईसा कासिम के संबंध में सुनवाई करने वाली है।

आले खलीफा की तानाशाही सरकार इससे पहले बारमबार शेख ईसा क़ासिम पर मुकद्दमा चलाने का प्रयास कर चुकी है परंतु उसे इस बात का भय है कि शैख ईसा कासिम पर मुकद्दमा चलाये जाने के बाद की स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकेगी इसलिए उसने शैख ईसा कासिम पर मुकद्दे को विलंबित कर दिया है और यह एक बार फिर इस प्रकार की स्थिति निकट हो रही है।

बहरैन की 14 फरवरी युवा क्रांति और इस देश के धर्मगुरूओं ने शैख ईसा कासिम का जो समर्थन किया है वह एक बार फिर आले खलीफा की तानाशाही सरकार को पीछे हटने पर बाध्य कर देगा और वह तानाशाही सरकार को शैख ईसा के अपमान की अनुमति नहीं देगा।

बहरैन के धर्मगुरूओं के कथनानुसार शैख ईसा क़ासिम पर मुकद्दमा चलाये जाने का अर्थ इस देश में धार्मिक अस्तित्व को लक्ष्य बनाना है। इस आधार पर शैख ईसा कासिम के विरुद्ध हर प्रकार का मुकद्दमा ग़लत और मूल्यहीन है।

बहरैन की 14 फरवरी युवा क्रांति ने एक विज्ञप्ति जारी करके जीवन की अंतिम सांस तक शैख ईसा कासिम के समर्थन पर बल दिया और उसे एक धार्मिक दायित्व बताया है।

बहरैन में इस समय जो राजनीतिक वातावरण है उसके दृष्टिगत प्रतीत यह हो रहा है कि अगर शैख ईसा कासिम पर मुकद्दमा चलाया गया तो इस देश में क्रांति का रूप बदल सकता है और इस देश की क्रांति के इतिहास में एक मोड़ आ जायेगा और उसके प्रभाव बहरैन की सीमा में सीमित नहीं रहेंगे।

पिछले जून महीने में शैख ईसा कासिम की नागरिकता समाप्त कर देने और उनके मकान के परिवेष्टन के बाद से उनके समर्थन में इस देश की जनक्रांति ने विस्तृत रूप धारण कर लिया है और आले खलीफा की तानाशाही सरकार बहरैनी जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को नियंत्रित न कर सकी।

बहरहाल बहरैनी जनता ने बारम्बार बल देकर कहा है कि तानाशाही सरकार के स्थान पर लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना और भेदभाव की समाप्ति तक उसका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। MM