अमेरिकी राष्ट्रपति की सऊदी यात्रा एतिहासिक होगीः आदिल जुबैर
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले अपनी विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब का चयन किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०६, २०१७ १५:२९ Asia/Kolkata

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले अपनी विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब का चयन किया है।

सऊदी अरब के विदेशमंत्री आदिल अलजुबैर ने अपनी हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी सऊदी अरब की यात्रा को एतिहासिक बताया और ईरान के विरुद्ध उनके कड़े दृष्टिकोण की प्रशंसा की।

आदिल अलजुबैर ने कहा कि मेरे अनुसार अमेरिकी सरकार ने ईरान को यह समझाने की दिशा में पहला कदम उठाया है कि तेहरान को अपना रवइया बदलना चाहिये। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले अपनी विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब का चयन किया है।

जारी महीने की 23 तारीख़ को ट्रंप की यात्रा आरंभ होगी। सऊदी अरब के विदेशमंत्री यह दर्शाने के प्रयास में हैं कि ट्रंप की रियाज़ यात्रा का अर्थ सऊदी अरब की नीतियों का समर्थन है।

सऊदी अरब में अतिवादी वहाबी विचारधारा, जिसे आले सऊद की तानाशाही सरकार का समर्थन प्राप्त है, विश्व में आतंकवाद के प्रचार- प्रसार का कारण बनी है। दूसरे शब्दों में आतंकवाद से मुकाबले के लिए सऊदी अरब के पास कोई कारण नहीं है जिस तरह अमेरिका कभी भी आतंकवाद को खत्म करने के प्रयास में नहीं था।

इस आधार पर मामले की समीक्षा व विश्लेषण दूसरे आयाम से करना चाहिये।

सऊदी अरब के बाद ट्रंप इस्राईल की यात्रा पर जायेंगे। दूसरे शब्दों में कई पहलुओं से ट्रंप ने रियाज़ की यात्रा को इस्राईल पर प्राथमिकता दी है।

उसका एक महत्वपूर्ण कारण सऊदी अरब के हाथों हथियारों की बिक्री है जबकि दूसरा कारण नैटो की भांति अरब देशों का एक सैन्य गठबंधन बनाना है जिसमें सऊदी अरब की विशेष व मुख्य भूमिका होगी। इसी कारण ट्रंप सऊदी अरब की यात्रा के अलावा फार्स खाड़ी के अरब नेताओं से भी भेंटवार्ता करेंगे।

जो चीज़ निश्चित है वह यह है कि अमेरिकी नीति के आधार उसके हित होते हैं परंतु बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि सऊदी अरब सहित बहुत से अरब देशों ने गत 10 वर्षों के दौरान हज़ारों अरब डॉलर बर्बाद कर दिये।

इन देशों ने न तो कोई मज़बूत राजनीतिक और सैनिक मोर्चा बनाया और न ही इस्लामी जगत को एकजुट करने का प्रयास किया।

अमेरिका और सऊदी अरब के संबंधों का एकमात्र परिणाम, इस्लामी देशों के विरुद्ध युद्ध में उसकी भागीदारी रही है। दूसरे शब्दों में अमेरिका ने मध्यपूर्व में अपनी नीति को सऊदी अरब और जायोनी शासन के समन्वय से आगे बढ़ाया है और यह प्रक्रिया यथावत जारी है। MM