अमरीकी राष्ट्रपति और सऊदी रक्षामंत्री दोनोंं ही ख़तरनाक नेताः इन्डिपेंडेंट
ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र इन्डिपेंडेंट ने लिखा है कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और सऊदी रक्षामंत्री मुहम्मद बिन सलमान दोनों ही संसार के बहुत ख़तरनाक नेता है।
इन्डिपेंडेंट ने अपने शनिवार के संस्करण में लिखा है कि अमरीकी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के रक्षामंत्री मुहम्मद बिन सलमान के व्यापक समर्थन का वचन दिया है। इस समाचारपत्र के अनुसार सऊदी रक्षामंत्री मुहम्मद बिन सलमान, डोनाल्ड ट्रम्प की सऊदी अरब की यात्रा के दौरान उन्हें इस बात के लिए राज़ी कर लेंगे कि ईरान के साथ टकराव की स्थिति में अमरीकी राष्ट्रपति, सऊदी अरब का साथ देंगे।
इन्डिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सरकार के विरुद्ध संयुक्त राज्य अमरीका और सऊदी अरब एकजुट हो चुके हैं। इस बारे में पहला निर्णय, ईरान में रहने वाले अल्पसंख्यकों का समर्थन करके उनमें व्यवस्था के विरुद्ध घृणा उत्पन्न करना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ में इस्लामी गणतंत्र ईरान के स्थाई प्रतिनिधि ने कुछ दिन पहले इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रसंघ महासचिव को पत्र भेजा है। अपने पत्र में उन्होंने सऊदी अरब के रक्षामंत्री के उस वक्तव्य को भी कोड किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वे युद्ध को ईरान की सीमाओं तक पहुंचाएंगे। इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रतिनिधि ने इस राष्ट्रसंघ के घोषणापत्र का खुला उल्लंघन बताया है।
ख़ुशरो ने कहा कि सऊदी अरब के रक्षामंत्री का शत्रुतापूर्ण बयान, न केवल ईरान के लिए गंभीर धमकी है बल्कि यह बयान, ईरान में आतंकवादी कार्यवाहियों में सऊदी संलिप्तता की ओर संकेत करता है जिसका एक उदाहरण ईरान के भीतर इस देश के 9 सीमा सुरक्षाबलों की शहादत की घटना है।
राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि इससे पहले भी यह बात सिद्ध हो चुकी है कि सऊदी अरब की नीतियां बहुत ही ख़तरनाक हैं। अलक़ाएदा, तालेबान और दाइश के गठन में सऊदी अरब की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। साथ ही इराक़ और सीरिया को अस्थिर बनाने में सऊदी अरब, आतंकवादी गुटों का समर्थन कर रहा है। विशेष बात यह है कि ट्रम्प के वाइट हाउस पहुंचने के साथ ही सऊदी अरब की ओर से मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि हुई है। अमरीका और सऊदी अरब में बढ़ती निकटता से बहुत से राजनैतिक टीकाकार चिंतित हैं क्योंकि उनके अनुसार वाशिग्टन और रेयाज़ के क्रियाकलाप किसी भी प्रकार से क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के हित में नहीं हैं।