क्या सऊदी अरब ने कहानी गढ़ी है?
सऊदी प्रशासन की यह धारणा है कि जिसे सऊदी अधिकारियों और मीडियाकर्मियों के मुंह से सुना जा सकता है कि अलक़तीफ़ प्रांत का अलअवामिया क्षेत्र जहां शीया आबादी है उसके सभी मोहल्ले क़ानून के प्रभुत्व से पूरी तरह निकल गए हैं, वहां आधुनिक हथियारों के भंडार हैं,
यहां तक कहा जा रहा है कि अवामिया में कुछ लोगों के पास आरपीजी तक मौजूद है जिसे सुरक्षा कर्मियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया।
यदि हम उस सैनिक आप्रेशन का जायज़ा लें जो एक सप्ताह पहले सऊदी प्रशासन ने शुरू किया उसका लक्ष्य यह बताया गया कि सऊदी प्रशासन 300 साल पुराने मुसव्वरा मोहल्ले का प्रशासनिक ढांचा बदलना चाहती है इस लिए कि इस मोहल्ले में जो पुराने घर हैं उनमें कुछ के चलते निवासियों के लिए ख़तरा है। यह भी संभावना है कि इन पुराने घरों को आतंकवादी तत्व सऊदी सरकार के विरुद्ध कार्यवाही के लिए इस्तेमाल कर लें या फिर इन घरों को मादक पदार्थों की स्मगलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाए। इसी लिए सऊदी प्रशासन बुल्डोज़रों और बक्तरबंद गाड़ियों के साथ इस इलाक़े में पहुंच गया ताकि उसका ढांचा बदल दे।
मगर सऊदी सरकार जो कुछ कह रही है वह सत्य नहीं प्रतीत हो रहा है। सच्चाई यह है कि यह पूरा मोहल्ला सऊदी सुरक्षा बलों की भयानक घेराबंदी में है और सऊदी प्रशासन इस मोहल्ले में रहने वालों के विरुद्ध हर प्रकार के हथियारों का प्रयोग कर रहा है।
हम यह समझते हैं कि हमारे सामने दो प्रकार की रिपोर्टें हैं जिनमें से एक रिपोर्ट से दूसरे का ब्योरा मिलता है। शायद यह दोनों रिपोर्टें इस शीया बहुल इलाक़े में घटने वाली घटनाओं की तसवीर पेश करती हैं। एक रिपोर्ट तो यह है कि सऊदी अरब ने ढांचा बदलने के नाम पर विध्वंस की जो कार्यवाही शुरू की है उससे वह दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि इस क्षेत्र में हथियारबंद तत्व मौजूद हैं जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है।
दूसरी अवधारणा यह है कि सऊदी अरब ने लड़ाई ईरान के भीतर ले जाने की धमकी दी थी लेकिन व्यवहारिक रूप से यह देखने में आ रहा है कि इस समय लड़ाई सऊदी अरब के भीतर पहुंच गई है।
बात यह है कि क़तीफ़ में अवामिया का इलाक़ा सऊदी अरब की दुखती रग है। सऊदी अरब को यह लग रहा है कि इस क्षेत्र के मामले उसके हाथ से निकल सकते हैं इस लिए पहले ही उसने सुरक्षा बल्कि रक्षा कार्यवाही शुरू कर दी है। वैसे अवामिया से सोशल मीडिया पर जो ख़बरें और वीडियो क्लिप्स आ रही हैं उनसे साफ़ ज़ाहिर है कि सऊदी सरकार की नीदें हराम हो चुकी हैं।
जहां तक ईरान की बात है तो एसा नहीं लगता कि वह सऊदी अरब से कोई टकराव चाहेगा। इसलिए कि इस समय ईरान की कोशिश इराक़ और सीरिया के मुद्दों पर केन्द्रित है तथा उसकी कोशिश है कि हिज़्बुल्लाह का समर्थन जारी है। दूसरी बात यह है कि ट्रम्प शासन से भी ईरान का टकराव है। इस लिए एसा नहीं लगता कि इन परिस्थितियों में ईरान क़तीफ़ के शीयों को हथियार सप्लाई करेगा।
अधिक संभावना इस बात की है कि सऊदी अरब ने अवामिया में निहत्थे लोगों के ख़िलाफ़ आप्रेशन शुरू किया है। सऊदी प्रशासन ने जो कहा है कि मुसव्वरा मोहल्ले के पुराने घरे वहां रहने वालों के लिए ख़तरनाक हो गए हैं तो यह बात भी समझ में आने वाली नहीं हैं इस लिए कि 300 साल से लोग इन्हीं इमारतों में रहते आ रहे हैं। यदि सऊदी शासन को इतनी ही चिंता थी तो इससे पहले कभी इन पुराने घरों का उसने क्यों नोटिस नहीं लिया। यह काम सऊदी प्रशासन एसे समय कर रहा है कि जब उसने ईरान से तनाव बढ़ा लिया है। बहरहाल मुसव्वरा के लोगों ने अपने घर छोड़ने से साफ़ इंकार कर दिया है तो क्या सऊदी प्रशासन उन्हें वहां से जबरन बाहर निकालेगा।
हम इतना जानते हैं कि कुछ शक्तियां हैं जो सऊदी अरब को एसे युद्ध के लिए उकसा रही हैं जिसका नुक़सान पूरे इस्लामी जगत को पहुंचेगा।
नोटः फ़िलिस्तीनी लेखक ख़ालिद जयूसी का यह लेख अरबी भाषा के रायुल यौम अख़बार ने प्रकाशित किया है