सऊदी अरब अपने ही लोगों पर बमबारी क्यों कर रहा है???
यह सवाल पिछले कई हफ़्तों से पूछा जा रहा है कि सऊदी अरब अपने ही लोगों पर क्यों बमबारी कर रहा है???
इसका जवाब एकदम स्पष्ट है। पूर्वी प्रांत क़तीफ़ में अवामिया के लोगों पर बिना किसी उकसावे के सिर्फ़ इसलिए बमबारी की जा रही है, क्योंकि यह लोग शिया हैं।
मध्यपूर्व से बाहर के लोगों के लिए यह बात चौंकाने वाली हो सकती है, लेकिन इससे ज़्यादा चैंकाने वाले सऊदी अरब के अल्पसंख्यक विरोधी क़ानून हैं, जो अल्पसंख्यकों को किसी तरह की धार्मिक आज़ादी नहीं देते।
मूल निवासी होने के बावजूद, शियों को सऊदी अरब में दूसरे दर्जे का नागरिक माना जाता है। इसीलिए उन्हें धार्मिक आज़ादी हासिल नहीं है और उनके अधिकारों को क़ानूनी रूप से औपचारिकता प्रदान नहीं की जाती।
सऊदी अरब में केवल वहाबी इस्लाम को मान्यता दी जाती है और उसके अलावा इस्लाम के किसी अन्य मतों को मानना प्रतिबंधित है।
इस्लाम के अन्य मतों को मानने वाले मुसलमानों के धार्मिक विश्वासों को सम्मान नहीं दिया जाता और उन्हें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर परेशान किया जाता है और उनके साथ व्यापक भेदभाव किया जाता है।
सऊदी अरब में 2014 में आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के नाम पर कई तरह के कठोर क़ानून बनाए गए।
जनवरी 2016 में आले सऊद शासन ने शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह बाक़िर निम्र अलनिम्र को मौत की सज़ा दे दी और सैकड़ों शिया कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया।
संक्षेप में कहा जा सकता है कि सऊदी शासन, शिया अल्पसख्यकों को औपचारिकता प्रदान नहीं करता और उन्हें समान नागरिक अधिकार नहीं देता है।
यहां तक कि 2009 में एचआरडब्लयू ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सऊदी अरब में शियों की अंधाधुंध गिरफ़्तारी और उनके साथ होने वाले भेदभाव की जांच के लिए एक आयोग का गठन होना चाहिए।
क़तीफ़ इलाक़े में शियों पर आले सऊद शासन के अत्याचारों का पुराना इतिहास है। 1970 के दशक में भी आले सऊद ने अमरीका के समर्थन से इस इलाक़े के शियों पर क्रैक डाउन किया था।
30 नवम्बर 1979 को सऊदी सुरक्षा बलों ने हमला करके दर्जनों शिया मुसलमानों को शहीद कर दिया था और सैकड़ों को घायल करके गिरफ़्तार कर लिया था।
2017 में भी आले सऊद इन अत्याचारों को दोहरा रहा है और विश्व समुदाय चुप्पी साधे हुए है, यहां तक कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प रियाज़ की यात्रा करके, आले सऊद के अत्याचारों में बराबर के भागीदार बन रहे हैं। msm