आख़िर सऊदी अरब और अमरीका, ईरान से नाराज़ क्यों हैं?
सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में अमरीकी-अरब सम्मेलन में सऊदी किंग सलमान ने खुलकर ईरान के ख़िलाफ़ भड़ास निकाली और जमकर आरोप लगाए।
किंग सलमान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और 55 अरब एवं इस्लामी देशों के नेताओं की उपस्थिति में ईरान पर इस्लामी चरमपंथ को निर्यात करने का आरोप लगाया।
किंग सलमान ने दावा किया कि ईश्वर और जनता के सामने हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम बुराई के सामने एकजुट हो जाएं, ईरानी शासन विश्व आतंकवाद का नेतृत्व कर रहा है।
सऊदी किंग ने अपने भाषण में कहा कि हम आतंकवाद का वित्तपोषण करने वाले को कभी भी और किसी भी तरह से आराम से नहीं रहने देंगे।
किंग सलमान के भाषण के बाद, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने अपने भाषण में ईरान को विश्व में अलग-थलग करने की बात कही।
ट्रम्प ने दावा किया कि लेबनान से लेकर, इराक़ और यमन तक ईरान आतंकवादियों को प्रशिक्षण दे रहा है, जो पूरे इलाक़े में हिंसा और अराजकता फैला रहे हैं।
सऊदी किंग और अमरीकी राष्ट्रपति ने आतंकवाद और चरमपंथ के विषय पर लम्बे लम्बे भाषण दिए, हालांकि दुनिया जानती है कि इन दोनों देशों के नेताओं को इस विषय पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
अमरीका ने जहां इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान पर हमला करके इन दोनों देशों की ईंट से ईंट बजा दी और दुनिया भर में आतंकवाद को हवा दी है, वहीं सऊदी अरब ने वहाबी चरमपंथी विचारधारा का प्रचार करके दाइश जैसे ख़ूंख़ार आतंकवादी गुटों को जन्म दिया है।
अमरीका और सऊदी अरब की ईरान से नाराज़गी की इसली वजह यह है कि ईरान इन दोनों देशों की विस्तारवादी एवं साम्राज्यवादी नीतियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट है।
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने ट्रम्प और किंग सलमान के आरोपों का जवाद देते हुए एक ट्वीक करके कहा है कि अभी अभी चुनावों से फ़ारिग़ हुए ईरान पर अमरीका ने लोकतंत्र और उदारवाद के गढ़ से हमला किया है। यह विदेश नीति है या 480 बिलियन डॉलर के लिए सऊदी अरब का दोहन है।
किंग सलमान पर तंज़ करते हुए ज़रीफ़ ने कहा है कि यह नया इतिहास रचने के लिए मैं किंग सलमान को बधाई देता हूं, और अमरीका में निवेश के लिए भी। msm