ट्रम्प की सऊदी यात्रा के बारे में हसन नसरुल्लाह का विचार
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के हालिया सऊदी अरब दौरे को एक बड़ी फ़ज़ीहत बताया है।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईल पर लेबनान की विजय की वर्षगांठ के अवसर पर 25 मई को अपने भाषण में मध्यपूर्व के मौजूदा हालात की समीक्षा की और कहा कि सऊदी अरब अमरीका के समर्थन से आतंकवाद फैला रहा है जबकि इस्लामी गणतंत्र ईरान, आतंकवाद से संघर्ष की रहा में गंभीर क़दम उठा रहा है। उनके भाषण में अनेक बिंदु थे जिनमें सबसे पहला अमरीकी राष्ट्रपति की सऊदी अरब की यात्रा और रियाज़ बैठक में उनकी सम्मिलिति के बारे में था। उन्होंने इस दौरे को एक बड़ी फ़ज़ीहत बताया क्योंकि आले सऊद ने आतंकवाद के समर्थन के आरोप से बचने के लिए अमरीका को घूस दी है। उनके भाषण का एक दूसरा बिंदु यह था कि ट्रम्प की रियाज़ यात्रा और अरब-इस्लामी बैठक के आयोजन से इस्लामी प्रतिरोध की गतिविधियाों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में इस बात पर बल देते हुए कि आतंकवाद से संघर्ष में इस्लामी प्रतिरोध पूरी तरह से डटा रहेगा, इस्लामी गणतंत्र ईरान को एकमात्र एेसा देश बताया जिसने इराक़ व सीरिया पर आतंकी गुट दाइश के हमले के समय इन देशों का साथ दिया।
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह की इन स्पष्ट बातों से पता चलता है कि अमरीका व सऊदी अरब और उनके अरब घटक न सिर्फ़ यह कि ईरान, हिज़्बुल्लाह और हमास को क्षेत्र में आतंकवाद के समर्थक और अस्थिरता का कारण नहीं बता सकते बल्कि उनके बयान से अमरीका, सऊदी अरब और उनके अरब घटक पहले से अधिक बेइज़्जित हुए हैं। यह फ़ज़ीहत इतनी स्पष्ट है कि अमरीकी समाचारपत्र वाॅशिंग्टन पोस्ट ने इस संबंध में लिखा कि अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टेलरसन ने सऊदी अरब में बैठ कर ईरान में मानवाधिकार की बात की। सऊदी अरब में रह कर ईरान में मानवाधिकार के हनन की आलोचना बड़ी निंदनीय है क्योंकि सऊदी अरब तो एेसा देश है जहां किसी भी प्रकार की राजनैतिक और धार्मिक आज़ादी है ही नहीं। (HN)