इस्राईल में निर्धनता में वृद्धि, युद्धोन्मादी नीतियों का परिणाम
एेसी हालत में कि विभिन्न शोध केन्द्र इस्राईल में निर्धनता में वृद्धि की सूचना दे रहे हैं, नेतनयाहू का मंत्री मंडल अपनी युद्धोन्मादी नीतियों को यथावत जारी रखे हुए है।
इस्रईल की सामाजिक नीतियों के शोध केन्द्र टीएयूबी ने घोषणा की है कि इस्राईल ओईसीडी के सदस्य देशों के बीच सबसे निर्धन है। इस्राईल ने 2010 में आर्थिक विकास और सहयोग संगठन ओईसीडी की सदस्यता स्वीकार की। यह संगठन वार्षिक रूप से अपने सदस्य देशों के बीच निर्धनता के स्तर के बारे में रिपोर्ट जारी करता है। जब से इस्राईल ने इस संगठन की सदस्यता स्वीकार की है तब से यह शासन सदस्य देशों के बीच सबसे निर्धन है।
अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की सबसे जटिल समस्या निर्धनता है। इस्राईल में वह परिवार निर्धनता की रेखा से नीचे होते हैं जिनकी मासिक आय 821 डाॅलर से कम है। इस आंकड़े के अनुसार इस्राईल की नेश्नल इन्शोरेंस संस्था की ओर से जारी किए जाने वाले आंकड़ों के आधार पर 17 लाख से अधिक इस्राईली अर्थात इस्राईल की जनसंख्या का 21.7 प्रतिशत भाग निर्धनता रेखा के नीचे जीवन व्यतीत कर रहा है। यह रिपोर्ट 2016 के अंत में जारी की गयी थी। दूसरे शब्दों में हर पांच इस्राईलियों से एक व्यक्ति निर्धनता रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहा है। इसमें चार लाख साठ हज़ार आठ सौ परिवार और सात लाख 64 हज़ार 200 बच्चे शामिल है जो निर्धनता रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट के आधार पर इस्राईल में जो परिवार निर्धनता रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं उनकी संख्या वर्ष 2014 में 18.8 प्रतिशत थी जबकि वर्ष 2015 में यह संख्या बढ़कर 19.1 प्रतिशत हो गयी। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इस्राईल में निर्धनता में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है। निसंदेह इस्राईल में निर्धनता में वृद्धि का मुख्य कारण इस शासन की युद्धोन्मादी नीतियां हैं जिसने क्षेत्र को तो एक रणक्षेत्र में बदल दिया है और साथ ही इस्राईल भी इस युद्ध की आग से स्वयं को बचा नहीं पा रहा है। (AK)