क़तर-सऊदी अरब विवाद के क्षेत्रीय परिणाम,
सऊदी अरब और क़तर के बीच इस समय जो संकट जारी है क्षेत्र के स्तर पर उसके गंभीर परिणाम होंगे।
इस विवाद में क़तर की सरकार पर देश के भीतर और क्षेत्र के स्तर पर दबाव बढ़ जाएगा लेकिन यह भी सच्चाई है कि इसके क्षेत्रीय परिणामों से सऊदी अरब के हित ख़तरे में पड़ जाएंगे।
सबसे पहली चीज़ तो यह है कि सऊदी अरब और क़तर के बीच तनाव में इमारत और मिस्र जैसे देश भी शामिल हो गए हैं वहीं सऊदी अरब ने यमन के विरुद्ध जो सैनिक गठजोड़ बनाया था वह भी प्रभावित हुआ है क्योंकि इस विवाद के बाद क़तर गठजोड़ से बाहर निकल गया है। हालांकि यमन में अब तक सऊदी अरब अपना कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं कर सका है। गठजोड़ से क़तर के निकल जाने के बाद यमन युद्ध के बारे में क़तर के अलजज़ीरा टीवी चैनल का रुख़ भी बदल जाएगा और यमन में जारी सऊदी गठबंधन की बर्बरता इस टीवी चैनल पर दिखाई देने लगेगी इससे भी सऊदी अरब पर दबाव बढ़ेगा।
दूसरी बात यह है कि क़तर और सऊदी अरब के विवाद से साफ़ पता चल गया कि सऊदी अरब ने रियाज़ में ट्रम्प को बुलाकर इस्लामी देशों के जिस गठबंधन का प्रदर्शन किया था वह भीतर से विरोधाभासों से जूझ रहा है। यही नहीं इस समय फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद पर भी इस समय अस्तित्व का ख़तरा मडराने लगा है जिसमें सऊदी अरब, क़तर, बहरैन, कुवैत, इमारात और ओमान शामिल हैं।
तीसरी बात यह है कि क़तर के साथ विवाद हो जाने के बाद सऊदी सरकार का अरब नैटो तैयार करने का ख़्वाब भी अधूरा रह गया है। ईरान के ख़िलाफ़ अरब नैटो तैयार करने के लिए सऊदी अरब ने पूरी जान लगा दी थी। मगर इस समय क़तर, ओमान और कुवैत जैसे देशों का झुकाव ईरान की ओर है।
चौथी बात यह है कि सऊदी अरब और क़तर के विवाद का असर सीरिया संकट में भी ज़रूर दिखाई देगा। वैसे तो यह दोनों ही देश सीरिया की बश्शार असद सरकार का तख्ता उलट देने की कोशिश में थे लेकिन दोनों देशों की ओर से अलग अलग चरमपंथी संगठनों को मदद दी जा रही थी। इस नए विवाद के बाद क़तर निश्चित रूप से सीरिया में लड़ रहे चरमपंथी संगठनों की मदद में कमी करेगा।
पांचवीं चीज़ यह है कि इस विवाद का असर सऊदी अरब और तुर्की के संबंधों पर भी ज़रूर पड़ेगा। हालांकि सऊदी अरब से तुर्की के संबंध हालिया वर्षों में बहुत अच्छे रहे हैं लेकिन क़तर से तुर्की के संबंध ज़्यादा मज़बूत हैं। क़तर में तुर्की की सैनिक छावनी भी है। इस विवाद में तुर्की की ओर से क़तर का समर्थन किए जाने की स्थिति में क्षेत्र में सऊदी अरब की स्थिति कमज़ोर होगी।