क़तर ने ईरान से संबंध रखने में दिलचस्पी दिखाई
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क़तरी विदेश मंत्री शैख़ मोहम्मद (बाएं) रूसी विदेश मंत्री लावरोफ़ (दाएं) से हाथ मिलाते हुए
क़तर ने ईरान के साथ सार्थक संबंध बनाने की इच्छा जतायी है।
क़तरी विदेश मंत्री शैख़ मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी ने रूस के दौरे पर शनिवार को मॉस्को में रशिया टुडे से इंटर्व्यू के दौरान यह बात कही, जहां उन्होंने अपने रूसी समकक्ष सिर्गेई लावरोफ़ से भी बातचीत की है।
शैख़ मोहम्मद ने कहा, “जहां तक ईरान से संबंध की बात है तो हर कोई ईरान से सार्थक संबंध चाहता है। ईरान पड़ोसी देश है।”
क़तरी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सभी देशों की स्ट्रैटिजिक पसंद होनी चाहिए और क़तरी राष्ट्र इन कोशिशों का समर्थन करता है।
क़तरी विदेश मंत्री ने साथ ही इस बात पर भी बल दिया कि अरब राष्ट्र ग़ज़्ज़ा स्थित हमास आंदोलन को वैध प्रतिरोधक आंदोलन मानते हैं न कि आतंकवादी संगठन जैसा कि अमरीका समझता है।
शैख़ मोहम्मद ने कहा कि हमास के बारे में दोहा का दृष्टिकोण फ़ार्स खाड़ी के अन्य देशों की तरह है।
उन्होंने कहा कि हमास की क़तर में उपस्थिति का मतलब यह नहीं है कि क़तर में हमास को समर्थन हासिल है। हमास की मौजूदगी हमास आंदोलन का राजनैतिक प्रतिनिधित्व है। क़तरी विदेश मंत्री ने कहा कि हम हमास का नहीं बल्कि हम फ़िलिस्तीनी जनता का समर्थन करते हैं।
इससे पहले इसी हफ़्ते सऊदी विदेश मंत्री आदिल अलजुबैर ने कहा था कि अगर क़तर फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों के साथ संबंध चाहता है तो उसे हमास और मिस्र के अख़वानुल मुस्लेमीन संगठन को कथित समर्थन ख़त्म करना होगा।
क़तरी विदेश मंत्री ने सभी विवादों को बातचीत के ज़रिए फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के फ़्रेमवर्क के भीतर हल करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ताज़ा हालात के पीछे बहुत ठोस वजह नहीं होनी चाहिए क्योंकि मौजूदा तनाव से दो दिन पहले तक फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों के साथ दोहा के दोस्ताना संबंध थे। उन्होंने कहा कि मई के अंत में बातचीत, बैठक और शिखर सम्मेलन हुए, जिसमें मौजूदा विवाद से जुड़े कोई सवाल नहीं उठे।
शैख़ मोहम्मद ने कहा कि क़तर की छवि को ख़राब करने के लिए सूचनाओं का तूफ़ान अचानक शुरु हुआ जिसमें क़तर के ख़िलाफ़ निराधार आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत है तो कार्यवाही करने से पहले उस पर वार्ता की मेज़ पर बात होनी चाहिए। क़तर को लगे आरोप की सफ़ाई का मौक़ा मिलना चाहिए।
ग़ौरतलब है कि सऊदी अरब की अगुवाई में क़तर को अलग थलग करने की कोशिश से क्षेत्र में तनाव हो गया है और क्षेत्रीय देशों के मत इस विषय पर विभाजित हैं। तुर्की मौजूदा विवाद में क़तर के साथ है और उसने रियाज़ की ओर से क़तर के ख़िलाफ़ संभावित सैन्य हमले के मद्देनज़र अपने सैनिक फ़ार्स खाड़ी के इस देश के लिए रवाना किए हैं।
शनिवार को बहरैन के विदेश मंत्री शैख़ ख़ालिद बिन अहमद बिन मोहम्मद आले ख़लीफ़ा ने तुर्की का दौरा किया लेकिन रिपोर्ट मिलने तक उनके इस दौरे के दौरान क्या बातें हुयीं, इस बारे में अभी तक ब्योरा सामने नहीं आया है। (MAQ/N)