बहरैनी जनता का दमन यथावत जारी है
बहरैन की तानाशाही सरकार इस देश के जिन धार्मिक नेताओं व कार्यकर्ताओं की नागरिकता समाप्त कर रही है उसका लक्ष्य इन लोगों को बहरैन के शांतिपूर्ण जनांदोलन से दूर करना है।
लगभग 3 सप्ताह का समय गुज़र रहा है जबसे बहरैनी सुरक्षा बलों ने वरिष्ठ शीया धर्मगुरू शैख ईसा कासिम के मकान का परिवेष्टन कर रखा है और यह उस स्थिति में है जब शैख ईसा कासिम के बारे में कोई सूचना नहीं है कि कहां और किस स्थिति में हैं और बहरैन विशेषकर इस्लामी जगत के लोग बहरैन से संबंधित समाचारों व परिवर्तनों पर नज़र रखे हुए हैं।
बहरैन के गृहमंत्रालय ने 20 जून 2016 को वरिष्ठ धर्मगुरू शैख ईसा कासिम की नागरिकता समाप्त करने की घोषणा की थी। बहरैन की तानाशाही सरकार के विरोधियों की नागरिकता समाप्त करना मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय घोषणापत्र से पूर्णविरोधाभास रखता है।
यह घोषणापत्र लोगों की राष्ट्रीयता को उनका निश्चित अधिकार समझता है और नागरिकता समाप्त किये जाने को ग़ैर कानूनी समझता है।
बहरैनी नागरिकों की नागरिकता को समाप्त करना और दूसरे देशों के लोगों को बहरैनी नागरिकता देना राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है और उसका मुख्य लक्ष्य आले खलीफा सरकार के हितों के परिप्रेक्ष्य में बहरैनी जनसंख्या के तानेबाने को परिवर्तित करना है।
बहरैन की तानाशाही सरकार इस देश के जिन धार्मिक नेताओं व कार्यकर्ताओं की नागरिकता समाप्त कर रही है उसका लक्ष्य इन लोगों को बहरैन के शांतिपूर्ण जनांदोलन से दूर करना है।
बहरैनी सरकार के क्रियाकलाप इस बात के सूचक हैं कि वह हर प्रकार के तरीके का प्रयोग करके शांतिपूर्ण आंदोलन को नियंत्रित करने के साथ ही अपने विरोधियों को राजनीतिक और सामाजिक मंच से हटाना चाहती है।
इसके लिए वह लोगों को गिरफ्तार करके जेल में बंद करती है, उन्हें तरह 2 प्रताड़ित करती है, लोगों के मकानों, इमामबाड़ों यहां तक मस्जिदों को भी ध्वस्त करती है फिर भी लोग अपनी वैध मांगों से पीछे नहीं हटे हैं।
यह ऐसी स्थिति में है जब बहरैन की तानाशाही सरकार द्वारा विरोधियों की नागरिकता समाप्त किये जाने पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भी प्रतिक्रिया जताई है।
बहरहाल बहरैन के वरिष्ठ शीया धर्मगुरू शैख ईसा क़ासिम के भविष्य को लेकर विस्तृत पैमाने पर इस देश की जनता की संवेदनशीलता आले खलीफा सरकार के लिए चेतावनी है कि उनके संबंध में हर प्रकार की असंतुलित कार्यवाही बहरैनी जनता के व्यापक विरोध और इस देश की स्थिति के और जटिल व गहन होने का कारण बनेगी। MM