इराक़ भी हुआ क़तर के साथ, सऊदी अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने मंगलवार की रात बल दिया कि बग़दाद, सऊदी अरब और उसके कुछ घटकों द्वारा क़तर को अलग थलग किए जाने का विरोधी है क्योंकि इस प्रकार की कार्यवाही से आम लोगों को नुक़सान पहुंचेगा।
फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने बुधवार को होने वाली अपनी सऊदी यात्रा की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस यात्रा के दौरान सऊदी अधिकारियों से क़तर के विरुद्ध लगाए गये आरोपों का स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
ईरान सहित बहुत से देश क़तर का परिवेष्टन किए जाने के विरोधी हैं। पिछले सप्ताह सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, बहरैन और मिस्र ने क़तर से अपने संबंध तोड़ लिए थे। इन देशों ने क़तर से मांग की है कि वह फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास का समर्थन समाप्त करे और कुछ अरब मामलों में उनकी हां में हां मिलाए।
क़तर के विदेशमंत्री शेख मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी का कहना है कि हम हमास को आतंकवादी संगठन नहीं मानते क्योंकि वह एक प्रतिरोधी संगठन है जो फ़िलिस्तीनियों को एकजुट करने में लगा है। फ़िलिस्तीनियों के समर्थन और फ़िलिस्तीनी नेताओं की आवभगत के कारण आजकल क़तर पर चारों ओर से दबाव डाला जा रहा है।
क़तर और सऊदी अरब का संकट, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के रियाज़ दौरे के बाद से आरंभ हुआ है।
ज्ञात रहे कि अमरीकी राष्ट्रपति के पहले विदेशी दौरे के दौरान सऊदी अरब - अमरीका के बीच 460 अरब डॉलर मूल्य के हथियारों के समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
इस समझौते के 2 भाग हैं। एक भाग तुरंत रूप से प्रभाव में आएगा और दूसरा भाग 10 साल की अवधि पर फैला हुआ है। हथियारों के समझौते का तुरंत रूप से प्रभाव में आने वाला भाग 110 अरब डॉलर मूल्य का है जबकि 10 साल की अवधि वाला हिस्सा 350 अरब डॉलर मूल्य का है। ट्रम्प के सऊदी अरब के दौरे के दौरान ही 110 अरब डॉलर मूल्य वाले भाग का क्रियान्वयन शुरु हो गया।
अमरीका और सऊदी अरब के बीच हथियारों का यह समझौता एेसी स्थिति में हुआ कि रियाज़ पिछले दो वर्षों से निर्धन अरब देश यमन पर भीषण हमले जारी रखे हुए है। (AK)