इस्राईल को अब "ज़ुल्फ़ेक़ार" से ख़तराः इस्राईली समाचार पत्र + फ़ोटो
इस्राईल से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र यरुश्लम पोस्ट का कहना है कि शहाब-3 के बाद ज़ुल्फ़ेक़ार मीज़ाइल इस्राईल के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है।
यरुश्लम पोस्ट ने लिखा कि ईरान पिछले कई वर्षों से शहाब -3 मीज़ाइल से इस्राईल को निशाना बनाने की क्षमता रखता था किन्तु अब ज़ुल्फ़ेक़ार नामक मीज़ाइल इस्राईल के लिए नया ख़तरा बन गया है।
फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार यरुश्लम पोस्ट ने अपने एक लेख में आतंकवादी गुट दाइश के ठिकाने पर आईआरजीसी के मीज़ाइल हमले और इस गुट से बदला लेने की समीक्षा की।
समाचार पत्र लिखता है कि ईरान ने सीरिया में दाइश को मीज़ाइल से निशाना बनाया किन्तु इस हमले के असली लक्ष्य, इस्राईल, सऊदी अरब और अमरीका थे।
इस्राईली समाचार पत्र अपने लेख में ईरान के साथ अमरीका और सऊदी अरब के हालिया तनाव में वृद्धि की ओर संकेत करते हुए लिखा कि आईआरजीसी के प्रवक्ता ने मीज़ाइल हमले के बाद अपने संदेश में अमरीका और सऊदी अरब का नाम विशेष रूप से लिया था जबकि इस्राईल का नाम नहीं लिया गया किन्तु इस्राईल को हमेशा से ईरान से ख़तरा रहा है, हमास और हिज़्बुल्लाह के माध्यम से, चाहे प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से।
यूरेश्लम पोस्ट ने बल दिया कि यह कोई नई बात नहीं है कि ईरान खुलकर दाइश, सऊदी अरब, अमरीका और इस्राईल को धमकी देता है किन्तु छह ज़ुल्फ़ेक़ार बैलेस्टिक मीज़ाइल को छह सौ किलोमीटर से अधिक की दूर से फ़ायर किया जाना, नयी बात है।
इस्राईली समाचार पत्र लिखता है कि मीज़ाइल फ़ायर होने के बाद इस्राईल के लिए ईरान का ख़तरा बहुत अधिक बढ़ गया है, अख़बार लिखता है कि ईरान की ओर से लंबी दूरी के इस प्रकार के शक्तिशाली हथियारों के प्रयोग से इस बात की प्रबल संभावना है कि ईरान दोबारा इन हथियारों को प्रयोग कर सकता है।
यरुश्लम पोस्ट ने ज़ायोनी प्रधानमंत्री और युद्धमंत्री के बयानों की ओर संकेत करते हुए जिन्होंने इस मीज़ाइली प्रतिशोध को महत्वहीन दर्शाने का प्रयास किया, लिखा कि जो लोग यह कहते हैं कि ईरान का मीज़ाइल हमला, इस्राईल के लिए कोई गंभीर परिवर्तन नहीं है, उनकी बातों से यह सिद्ध होता है कि ईरान वर्षों से शेहाब-3 और दूसरी कम आधुनिक मीज़ाइलों से इस्राईल को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
समाचार पत्र लेख के अंत में लिखता है कि लंबी दूरी के ज़ुल्फ़ेक़ार मीज़ाइल, शायद अमरीका और सऊदी अरब की छावनियों के लिए महत्वपूर्ण हों किन्तु यह इस्राईल के लिए नया ख़तरा हैं। (AK)