क्षेत्रीय हंगामों का मुख्य लक्ष्य, फ़िलिस्तीन को भुला देना हैः नसरुल्लाह
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लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह का कहना है कि क्षेत्र के आजकल के परिवर्तनों का लक्ष्य, ज़ायोनी शासन के हित में फ़िलिस्तीन के विषय को समाप्त करने के लिए माहौल बनाना है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun २३, २०१७ २२:१६ Asia/Kolkata
  • क्षेत्रीय हंगामों का मुख्य लक्ष्य, फ़िलिस्तीन को भुला देना हैः नसरुल्लाह

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह का कहना है कि क्षेत्र के आजकल के परिवर्तनों का लक्ष्य, ज़ायोनी शासन के हित में फ़िलिस्तीन के विषय को समाप्त करने के लिए माहौल बनाना है।

इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस के उपलक्ष्य में अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्र की हालिया वर्षों की घटनाओं का मुख्य लक्ष्य, फ़िलिस्तीन मुद्दे को भुला देना है। उनका कहना था कि विश्व शक्तियों और अमरीका के षड्यंत्रों का लक्ष्य, सीरिया सहित प्रतिरोध के मोर्चे को नुक़सान पहुंचाना है। उनका कहना था कि प्रतिरोध का मोर्चा, अरब-इस्राईल षड्यंत्रों में सबसे बड़ी रुकावट है और यही कारण है कि प्रतिरोध के मोर्चे को सबसे बड़ा आतंकवादी गुट बताने का प्रयास किया जा रहा है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि विश्व क़ुद्स दिवस ईरान या अरब जगत से विशेष नहीं है। उनका कहना था कि विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियां, फ़िलिस्तीन के विषय को ज़िंदा रखने के लिए निकाली जाती हैं और शीघ्र ही समस्त रुकावटों को दूर करके दुनिया के समस्त लोग और राष्ट्र, फ़िलिस्तीन के वैश्विक समर्थन के विषय को पुनर्जीवित करेंगे।

हिज़्बु्ल्लाह के महासचिव ने इसी प्रकार यमन के हालात की ओर संकेत करते हुए कहा कि यमन के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का मुख्य कारण, उस गुट का अस्तित्व है जिसने अमरीका और पश्चिम के हितों को ख़तरे में डाल दिया है। 

उनका कहना था कि प्रतिरोध का मोर्चा, ज़ायोनी शासन से संबंध सामान्य बनाने वाले मोर्चे के मुक़ाबले में खड़ा है और आज यह मोर्चा फ़िलिस्तीन और इस्लामी राष्ट्र के हितों का समर्थन कर रहा है।

ज्ञात रहे कि विश्व क़ुद्स दिवस के उपलक्ष्य में लेबनान के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर रैलियां निकाली गयीं जिनमें लाखों की संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर ज़ायोनी शासन के विरुद्ध और फ़िलिस्तीन के हक़ में नारे लगाए। (AK)