सऊदी अरब को गंभीर चुनौतियों का सामना
ग़लत नीतियों के कारण सऊदी अरब को वर्तमान समय में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एेसी ख़बरे आ रही हैं कि क़तर पर प्रतिबंध लगाकर सऊदी अरब के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। सऊदी अरब की मनमानी नीतियों के कारण फ़ार्स की खाड़ी की सहकारिता परिषद के कुछ सदस्य देशों ने रियाज़ का विरोध किया है। हालिया कुछ सप्ताहों के दौरान ओमान और क़तर जैसे देशों ने इस बारे में अपना विरोध जताया है। इसके अतिरिक्त क़तर जैसे देश की ओर से सऊदी अरब के मुक़ाबले में डट जाना यह बताता है कि सऊदी अरब का विरोध अब अरब जगत में भी बढ़ रहा है। क़तर और ओमान जैसे देशों का मानना है कि फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद को सऊदी अरब के प्रभाव को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रयोग किया जा रहा है। इन देशों ने एेसे संकेत दिये हैं कि जैसे उन्हें इस परिषद की सदस्यता में कोई रुचि नहीं है। इन परिस्थितियों में बहुत से राजनैतिक टीककार यह मानते हैं कि सऊदी अरब के मुक़ाबले में क़तर का उठ खड़ा होना, रेयाज़ की पराजय का परिचायक है। उनका कहना है कि क़तर के बारे में सऊदी अरब की पराजय इस बात से भी सिद्ध होती है कि फ़ार्स की खाड़ी के समस्त देशों ने क़तर के विरुद्ध रेयाज़ का समर्थन नहीं किया। दूसरी ओर तकफ़ीरी आतंकवादी गुटों के समर्थन के कारण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब की छवि बिगड़ती जा रही है। यही कारण है कि बहुत से देशों में अब सऊदी अरब के विरुद्ध नकारात्मक सोच पनपने लगी है।
दूसरी ओर सऊदी अरब के भीतर भी इस देश की दमनकारी नीतियों के कारण लोगों में आक्रोश पाया जाता है।वहां पर राजनैतिक कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर प्रतिबंध तथा स्वतंत्र रूप में अभिव्यक्ति करने वालों पर सरकारी अत्याचारों के कारण सऊदी अरब के लोग, सऊदी शासन की हिंसक नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शनों पर उतर आए हैं। हालांकि इन प्रदर्शनों का दमन कर दिया जाता है किंतु वहां के लोग, इस शासन से इतना अधिक क्रोधित हैं कि वे हर प्रकार के दमन के बावजूद निरंतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
सऊदी अरब के परिवर्तन यह दर्शाते हैं कि आले सऊद परिवार की सत्ता वाला यह देश अपनी ग़लत नीतियों के कारण अब राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नाना प्रकार के संकटों में बुरी तरह से घिर चुका है जिसके कारण उसके बारे में नकारात्मक सोच बढ़ती जा रही है।