क़तर संकट, सऊदी अरब के बाद यूएई ने भी दिखाई आंख
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ऐसा प्रतीत होता है कि क़तर के साथ सऊदी अरब और उसके घटकों का संकट शीघ्र समाप्त होने वाला नहीं है और लंबा चलेगा।
(last modified 2023-11-29T09:15:15+00:00 )
Jun २८, २०१७ २०:३७ Asia/Kolkata
  • क़तर संकट, सऊदी अरब के बाद यूएई ने भी दिखाई आंख

ऐसा प्रतीत होता है कि क़तर के साथ सऊदी अरब और उसके घटकों का संकट शीघ्र समाप्त होने वाला नहीं है और लंबा चलेगा।

क़तर के साथ सऊदी अरब और उसके घटकों का संकट जल्द ही समाप्त होने वाला नहीं है और यह ऐसा मामला है जो शीघ्र समाप्त होने वाला नहीं है। सऊदी अरब ने वार्ता का दरवाज़ा बंद कर दिया है जबकि संयुक्त अरब इमारत ने दोहा के विरुद्ध प्रतिबंध कड़े करने की बात कही है। जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था और अब लग भी ऐसा ही रहा है कि क़तर संकट इतनी जल्दी समाप्त होने वाला नहीं है और इसने व्यापक रूप धारण कर लिया है।

जब यह संकट उभर कर सामने आया तब इस संकट के पैदा होने और इसके हल के बारे में विभिन्न राय पेश की गयी यहां तक कि कुछ अरब टीकाकारों ने क़तर के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही और इस देश की सरकार बदलने तक की बात कह डाली। अभी तक यह समझ में नहीं आ रहा है कि यह संकट किस प्रकार समाप्त होगा किन्तु क़तर के विदेशमंत्री के बयान से यह बात समझ में आ गयी है कि सऊदी और उसके घटकों की 13 शर्तों को क़तर मानने को तैयार नहीं है और इससे स्पष्ट हो गया कि क़तर सऊदी अरब और उसके घटकों के समाने घुटने टेकने को तैयार नहीं है।

दूसरी ओर सऊदी अरब के विदेमशंत्री आदिल अलजुबैर ने अपने अड़ियल रवैये और बिना किसी शर्त के क़तर द्वारा शर्तें स्वीकार करने की बात कह कर दोहा के साथ वार्ता का दरवाज़ा ही बंद कर दिया। अरब जगत के नेतृत्व का दावा करने वाले सऊदी अरब को शायद यह समझ में नहीं आ रहा है कि एक दिन ऐसा आएगा कि कि क़तर जैसा छोटा सा देश उसके समने डट जाएगा।

यहां पर अमरीका का दृष्टिकोण भी ध्यान योग्य है। वाशिंग्टन ने भी दबे छिपे शब्दों में जहां सऊदी अरब की मांगों का समर्थन किया वहीं उसने इससे पहले क़तर के साथ हथियारों के समझौते के हस्ताक्षर भी किए हैं। क़तर संकट के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और अमरीकी विदेशमंत्रालय के बयान अलग अलग नज़र आए। इसी बीच कुवैत की भी मध्यस्थता जारी रही किन्तु अभी तक इसका कोई लाभ नहीं पहुंचा है।

सऊदी अरब और उसके घटकों द्वारा क़तर के सामने पेश की गयी 13 शर्तें पर क़तर की ओ से सकारात्मक उत्तर भी नहीं दिया गया जबकि क़तर के विदेशमंत्री वाशिंगेटन के दौरे पर हैं ताकि इस मामले का हल निकाल सकें। क़तर ने इन शर्तों को अवास्तविक, असंतुलित और अतार्किक बताया है जिस पर अमल करना असंभव है।

अब संयुक्त अरब इमारात ने क़तर के विरुद्ध प्रतिबंध कड़े करने की बात कही है, यानी कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है और अपनी बात पर अड़े हुए हैं। अब वाशिंग्टन में होने वाली बैठक की बातें हो रही हैं कि यह संकट, क्षेत्रीय संकट के स्तर से निकल कर बाहरी संकट में परिवर्तित हो चुका है। अभी तक इस बैठक का तारीख़ की घोषणा नहीं की गयी है किन्तु अमरीका और क़तर के विदेशमंत्रियों की मुलाक़ात के दृष्टि ऐसा लग रहा है कि यह बैठक अगले कुछ ही दिनों में होने वाली है। (ak)