अरब संकट वार्ता द्वारा ही हल हो सकता हैः क़तरी विदेशमंत्री
क़तर के विदेशमंत्री ने कहा है कि उनका देश अरब संकट के समाधान के लिए वार्ता में भाग लेने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है किन्तु वार्ता परस्पर सम्मान के साथ स्पष्ट परिधि में होना चाहिए, धमकी के आधार पर नहीं।
हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, क़तर के विदेशमंत्री ने मंगलवार को दोहा में जर्मनी के विदेशमंत्री ज़िगमार गैब्रियल के साथ संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में कहा कि क़तर, अरब संकट के समाधान के लिए क़तर पर प्रतिबंध लगाने वाले चार अरब देशों के साथ वार्ता में पूर्ण रूप से भाग लेने को तैयार है। उनका कहना था कि क़तर ने संकट के आरंभ में ही वार्ता की मांग की थी।
क़तर के विदेशमंत्री मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी ने कहा कि क़तर ने बारंबार अपने दृष्टिकोणों का ब्योरा दिया है और अब अन्य देशों को अपने दृष्टिकोण निर्धारित करने चाहिए। उनका कहना था कि दूसरे देशों की ओर वर्चस्व थोपने को क़तर रद्द करता है।
क़तर के विदेशमंत्री ने इसी प्रकार कहा कि क़तर का घेराव करने वाले देशों के व्यवहार से उनकी नीतियों का पता चलता है और क़तर ने किसी देश पर अतिक्रमण नहीं किया और जितनी भी कड़ी कार्यवाही कर ली जाए उसका कोई फ़ायदा नहीं है तथा केवल वार्ता द्वारा ही संकट का समाधान किया जा सकता है।
ज्ञात रहे कि सोमवार को क़तर के विदेशमंत्री ने कुवैत नरेश से मुलाक़ात में पाबंदी लगाने वाले देशों की मांग के संबंध में क़तरी शासक तमीम बिन हमद बिन ख़लीफ़ा आले सानी का लिखित जवाब कुवैत के शासक सबाह अहमद जाबिर अस्सबाह को सौंप दिया था।
ज्ञात रहे कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, मिस्र और बहरैन ने 5 जून 2017 को क़तर के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के लिए 13 शर्तें रखी थीं और इन्हें मानने के लिए 10 दिया का समय दिया था। शर्तो की समयावधि 3 जुलाई को समाप्त हो गयी थी।
सऊदी अरब की मुख्य शर्तों में ईरान, हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ संबंधों को तोड़ना, अलजज़ीरा नेटवर्क को बंद करना और तुर्की के सैन्य अड्डे को हटाना था। (AK)