बहरैनी क़ैदियों ने भूख हड़ताल की
आले खलीफा के बहुत से विरोधियों के अपहरण के बाद पता भी नहीं है कि वे कहां और किस हालत में हैं।
बहरैन की जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों ने अपनी दुर्दशा और बहरैन की तानाशाही सरकार के अत्याचारों के जारी रहने के विरोध में भूख हड़ताल की है।
बहरैन की जेलों में बंद राजनीतिक क़ैदियों को विभिन्न प्रकार की यातनाओं का सामना है और वे क़ैदी के अपने मूल अधिकार से भी वंचित हैं।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि आले खलीफा सरकार की मानवता विरोधी कार्यवाहियां इस बात कारण बनी हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहरैन की गणना मानवाधिकारों का हनन करने वाले मुख्य देश के रूप में होती है और विश्व जनमत बहरैनी जनता की दुर्दशा से चिंतित है।
कोई दिन ऐसा नहीं गुज़रता जब बहरैन की तानाशाही सरकार की ओर से विरोधियों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने और उन्हें प्रताड़ित करने की खबर प्रकाशित न होती हो। यह उस स्थिति में है जब आले खलीफा के बहुत से विरोधियों के अपहरण के बाद पता भी नहीं है कि वे कहां और किस हालत में हैं।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बहरैन की तानाशाही सरकार ने जो दमनकारी नीति अपनाई है वह इस बात की सूचक है कि आले खलीफा सरकार लोगों की आवाज़ दबा देने की चेष्टा में है।
इस संबंध में एक अमेरिकी विश्लेषक राल्फ शॉनमैन ने कहा है कि बहरैन में विरोधियों का दमन जारी है।
उन्होंने कहा कि बहरैनी सरकार सऊदी सुरक्षा बलों की सहायता से इस देश के समस्त शीया समुदाय को लक्ष्य बना रही है और वह इस देश में लोकतंत्र की मांग करने वाली हर आवाज़ को दबाने की चेष्टा में है।
उन्होंने आगे कहा कि विरोधियों के मुकाबले में बहरैनी सरकार की कार्यवाहियां मानवाधिकारों और नागरिकों के डेमोक्रेटिक अधिकारों के उल्लंघन में इस सरकार की पहचान की सूचक हैं।
बहरैन की तानाशाही सरकार विभिन्न बहानों और जनमत को धोखा देने वाली नीति के माध्यम से फूट डालने वाली अपनी नीति को आगे बढ़ाना चाहती है परंतु बहरैनी जनता की होशियारी और प्रतिरोध सरकार विरोधी उसके संघर्ष के जारी रहने का कारण बना है।
बहरैन के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत पैमाने पर होने वाले जनप्रदर्शनों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM