दाइश के बाद इराक़ की क्या हैं चिंताएं
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मूसिल में आतंकवादी गुट दाइश के विरुद्ध युद्ध समाप्त हो गया है किन्तु कुछ समस्याओं के बाक़ी रहने और दाइश के आतंकियों की संभावित गुप्त गतविधियां इराक़ के भविष्य के लिए चिंता का विषय हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ०९, २०१७ १४:३८ Asia/Kolkata
  • दाइश के बाद इराक़ की क्या हैं चिंताएं

मूसिल में आतंकवादी गुट दाइश के विरुद्ध युद्ध समाप्त हो गया है किन्तु कुछ समस्याओं के बाक़ी रहने और दाइश के आतंकियों की संभावित गुप्त गतविधियां इराक़ के भविष्य के लिए चिंता का विषय हैं।

तसनीम न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार अरबी भाषा में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र राय अलयौम के संपादक अब्दुल बारी अतवान ने दाइश के बाद के चरण में इराक़ के सामने मौजूद कुछ चिंताजनक विषयों को बयान किया। संपादक लिखते हैं कि मूसिल में दाइश के विरुद्ध युद्ध समाप्त हो चुका है किन्तु युद्ध के बाद के कुछ मामलों के दृष्टिगत मूसिल का युद्ध कुछ लंबा खिंच सकता है।

मूसिल के पुनर्निमाण के क्षेत्र में बेहतर सेवाएं प्रदान करने में इराक़ी सरकार की अक्षमता, चिंताजनक विषय है विशेषकर यह कि पूर्वी मूसिल की स्वतंत्रता को छह महीने का समय हो रहा है किन्तु अभी तक इस क्षेत्र में बिजली की सप्लाई आरंभ नहीं हुई है और काम पर लौटने वाले कारगरों को वेतन नहीं मिले हैं और मूसिल का प्रसिद्ध विश्वविद्यालय खंडहर में परिवर्तित हो गया है।

उन्होंने लिखा कि दाइश के बाद मूसिल के सामने मौजूद समस्याएं निम्न लिखित हैंः

पहलीः मुख्य कारण जिस वजह से इराक़ी और क्षेत्रीय बलों के बीच एकजुटता पैदा हुई थी और वह एक गठबंधन के रूप में सामने आए थे वह आतंकवाद गुट दाइश से संघर्ष था जो सभी बलों का एक लक्ष्य और संयुक्त हित था किन्तु अब यह वजह समाप्त हो गयी है और अब यह प्रश्न उठने लगा है कि इन परिस्थितियों में इन गठबंधनों का भविष्य क्या होगा? क्या इराक़ में इस गठबंधन के सदस्य आपस में भिड़ जाएंगे? क्या मसऊद बारेज़ानी ने इराक़ के विभाजन का तीर चला दिया है?

दूसरीः इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रमुख मसऊद बारेज़ानी ने कुर्दिस्तान क्षेत्र में सितंबर के महीने में जनमत संग्रह के आयोजन की घोषणा कर दी है और वह इस प्रयास में हैं कि तेल की दौलत से मालामाल करकूक क्षेत्र नई सरकार का भाग हो।

इन विषयों के दृष्टिगत अब यह सवाल पैदा होता है कि क्या उन्होंने जातीय और सांप्रदायिक मतभेदों के आधार पर इराक़ के विभाजन का तीर चला दिया है? या दाइश के बाद इराक़ में अरबों और कुर्दों के बीच भीषण रक्तरंजित झड़पें होंगी?

तीसरीः इराक़ में एक शक्तिशाली पक्ष, समस्त राजनैतिक व सामाजिक पक्षों पर विजयी रहा है और इसमें कोई बात नहीं है किन्तु अब यह देखना होगा कि विजयी पक्ष कैसा बर्ताव करेगा? क्या वह बदला लेना आरंभ करेगा या अमरीकी ग़लतियों से पाठ सीखेगा और किसी भी धड़े को किनारे नहीं लगाएगा बल्कि वह शांतिपूर्ण ढंग से रहने, वार्ता, समानता, सामाजिक न्याय की स्थापना और इराक़ी राष्ट्रीय पहचान को मज़बूत करने का प्रयास करेगा?

चौथीः मूसिल के पुनर्निमाण के लिए ही केवल अरबों डाॅलर की आवश्यकता है और पूरे इराक़ के पुनर्निमाण के लिए 60 अरब डालर की ज़रूरत है यह एेसी स्थिति में है कि इराक़ का ख़ज़ाना भ्रष्टाचार और चोरी के कारण ख़ाली हो चुका है। अब सवाल यह पैदा होता है कि इस ख़र्चे को कहां से पूरा किया जाएगा और जो पक्ष यह ख़र्चा सहन करेगा उसकी क्या शर्तें होंगी और वह क्या विशिष्टता चाहेगा?

पांचवींः इराक़ में मौजूद विदेशी सैनिकों का भविष्य क्या होगा? वर्तमान समय में इराक़ में अमरीका के छह हज़ार सैनिक और बाशीक़ा सैन्य छावनी में तुर्की के दो हज़ार तथा दूसरे देशों के हज़ारों सैनिक मौजूद हैं जो दाइश के चंगुल से मूसिल को स्वतंत्र कराने के अभियान में इराक़ी सैनिकों का साथ दे रहे हैं

इन हालात के दृष्टिगत क्या इन लक्ष्यों के व्यवहारिक होने के बाद यह सैनिक इराक़ से निकल जाएंगे या इस बार कुर्दिस्तान सरकार को बचाने के लिए युद्ध में कूद पड़ेंगे। दूसरा सवाल यह है कि क्या यह सैनिक इराक़ में मौजूद तुर्क सैनिकों से मुक़ाबला करेंगे या फिर एक सुन्नी समूह को अस्तित्व में लाने के लिए आपस में भिड़ जाएंगे?

बहरहाल वर्तमान समय में मूसिल की स्वतंत्रता का जश्न तो मनाना चाहिए किन्तु मूसिल सिटी की स्वतंत्रता के बाद के चरणों में इराक़ी सरकार और उसके घटों के निर्धारित कार्यक्रम न होने के कारण यह कहा जा सकता है कि यह पांच चीज़ें चिंताजनक हैं।