क़तर के ख़िलाफ़ पक रही है नई खिचड़ी!
क़तर की ज़मीनी, हवाई और समुद्री घेराबंदी करने वाले चार अरब देशों सऊदी अरब, इमारात, बहरैन और मिस्र ने मनामा में विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में किसी नए दंडात्मक क़दम की तो घोषणा नहीं की लेकिन इस पत्रकार सम्मेलन का माहौल पूरी तरह उत्तेजक था।
इस बात की पूरी संभावना है कि चारों देशों के बीच कई समझौते हुए हों लेकिन उनकी घोषणा अभी न की गई हो और आने वाले दिनों में हम इन गुप्त समझौतों के व्यवहारिक असर देखें।
सबसे ख़तरनाक बिंदु वह था जो सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने पत्रकार सम्मेलन में बयान किया और इसके बाद अलअरबिया टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार में इस बात को दोहराया, शायद उन्होंने अपनी सरकार के निर्देश पर एसा किया। जुबैर ने कहा कि क़तर ने मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों के अंतर्राष्ट्रीयकरण की मांग की है अर्थत पवित्र स्थलों की देखभाल की ज़िम्मेदारी इस्लामी देश संयुक्त रूप से संभालें। क़तर की यह मांग सऊदी अरब के विरुद्ध जंग का एलान है जिस पर जवाबी कार्यवाही का अधिकार हमारे पास सुरक्षित है। आदिल अलजुबैर का इशारा संयुक्त राष्ट्र संघ में क़तर मानवाधिकार समिति की शिकायत की ओर था। इस शिकायम में क़तर की महिला प्रतिनिधि ने कहा कि उनके देश को सऊदी अरब में धार्मिक स्थलों के राजनीतिकरण पर गहरी चिंता है क्योंकि सऊदी सरकार इसे राजनैतिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करती है और इस संदर्भ में सभी अंतर्राष्ट्रीय नियमों और परम्पराओं का उल्लंघन कर रही है। इस शिकायत में क़तर ने मांग की कि धार्मिक स्थलों की राजनीति से अलग किया जाए।
क़तर की सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि उनका देश ने संयुक्त राष्ट्र संघ और युनेस्को में यह शिकायत मजबूर हो जाने के बाद की। इस लिए कि मध्यस्थता के सारे प्रयास विफल हो गए, अरग लीग तो बिल्कुल ही ग़ायब है और फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद निष्क्रय होकर रह गई है। जबकि इस बीच सऊदी सरकार के फ़ैसलों के कारण क़तर के हाजियों के लिए भारी कठिनाइयां पैदा हो गई हैं। सऊदी अरब में हज के अधिकारियों ने क़तरी हाजियों का रजिस्ट्रेशन करने से इंकार कर दिया और यह निर्देश दिया कि क़तर के जो लोग हज करना चाहते हैं वह पहले किसी तीसरे देश में जाएं और वहां से सऊदी अरब आएं। इसका मतलब साफ है कि क़तर के हाजियों को भारी कठिनाई झेलनी पड़ेगी।
जैसे ही मक्का और मदीना में पवित्र स्थलों के अंतर्राष्ट्रीयकरण को कोई बात भी उठती है तो सऊदी अरब बुरी तरह तिलमिला जाता है, इसे सऊदी अरब अपनी संप्रभुता का हनन समझता है। सऊदी अरब को यह महसूस होने लगता है कि उसकी क्षमताओं पर सवालिया निशान लग रहा है।
आदिल अलजुबैर ने जो बयान दिया है उससे साफ़ ज़ाहिर हो गया कि संयुक्त राष्ट्र संघ और युनेस्को में क़तर द्वारा की जाने वाली शिकायत को सऊदी अरब ने एलाने जंग माना है और वह इसका जवाब देने की कोशिश में है। सवाल यह है कि यह जवाबी कार्यवाही कब और किस तरह होगी?
क्या यह सैनिक चढ़ाई की ओर इशारा है। शायद यह पहला अवसर है कि सऊदी अरब के किसी अधिकारी ने इस स्वर में बात की है। बहरैन के विदेश मंत्री शैख़ ख़ालिद बिन अहमद आले ख़ालीफ़ा ने भी मीडिया में आने वाली इन रिपोर्टों का खंडन नहीं किया कि क़तर के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही की तैयारी शुरू हो चुकी है। मिस्र के विदेश मंत्री सामेह अश्शुक्री ने भी इस संबंध में भ्रामक जवाब दिया।
मध्यस्थता के सारे प्रयास विफल हो जाने के बाद अब एसा लगता है कि हालात टकराव की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले दिनों और हफ़्तों में चारों अरब देशों की ओर से क़रत के विरुद्ध कुछ बड़ी कार्यवाही हो सकती है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक