तलअलफ़र की आज़ादी का अभियान आरंभ
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इराक़ के तलअफ़र नगर को दाइश के चंगुल से स्वतंत्र कराने का अभियान आज से आरंभ हो गया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २०, २०१७ १०:२५ Asia/Kolkata
  • तलअलफ़र की आज़ादी का अभियान आरंभ

इराक़ के तलअफ़र नगर को दाइश के चंगुल से स्वतंत्र कराने का अभियान आज से आरंभ हो गया।

इराक़ के प्रधानमंत्री ने रविवार की सुबह आधिकारिक घोषणा की है कि नैनवा प्रांत की राजधानी मूसिल से 50 किलोमीटर पश्चिम में स्थित नगर तलअफ़र को आतंकवादी गुट दाइश के नियंत्रण से निकालने का सैन्य अभियान आरंभ हो रहा है।

हैदर अलएबादी ने कहा है कि आतंकवादियों से तलअफ़र को स्वतंत्र कराने के लिए आरंभ हुए सैन्य अभियान में सेना और सुरक्षाबलों के साथ ही साथ स्वयंसेवीबल या हश्दुश्शाबी भी शामिल हैं।  वर्तमान समय में इराक़ के तीन नगर आतंकवादी गुट दाइश के नियंत्रण में हैं।  तलअफ़र,होवैजा और अलक़ाएम।  नैनवा प्रांत का तलअलफ़र नगर, जून 2014 को पीशमर्गा कुर्दबलों के पीछे हटने के कारण दाइश के हाथों में चला गया था।  मूसिल अभियान के साथ ही इराक़ के स्वयंसेवियों ने तलअफ़र का घेराव आरंभ कर दिया था।  इराक़ी स्वयंसेवियों की ओर से घेराव पूरा होने के साथ ही तलअफ़र की स्वतंत्रता का अभियान आरंभ कर दिया गया।तलअफ़र की स्वंतत्रता का अभियान, दाइश से मुक़ाबले के प्रति इराक़ियों के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

यहां पर विशेष बात यह है कि दाइश को धूल चटाने में हश्दुश्शाबी की विशेष भूमिका के कारण कुछ सरकारें, गुट और लोग, इराक़ के इस प्रतिरोधी गुट का विरोध करने लगे हैं जिनमें तुर्की भी है।  दाइश के चंगुल से तलअफ़ को स्वतंत्र कराने के अभियान का तुर्की की ओर से विरोध होता रहा है।  इसके अतिरिक्त अमरीका और सऊदी अरब भी इराक़ के स्वयंसेवियों के आरंभ से विरोधी रहे हैं।  राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि इसका एक प्रमुख कारण यह है कि दाइश के बहुत से सरग़ना, दाइश विरोघी कार्यवाही से डरकर तलअफ़र भाग गए हैं।  अब सऊदी अरब, अमरीका और तुर्की की ओर से अलअफ़र की स्वतंत्रता के अभियान का विरोध इसलिए किया जा रहा है ताकि मौक़ा पाकर दाइश के सरग़ना, अलअफ़र छोड़कर दूसरी जगह भाग जाएं।

इराक़ के स्वयंसेवी बल का गठन इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़त्वे पर किया गया था।  इस बल में इराक़ के सभी वर्ग के लोग शामिल हैं।  इराक़ की संसद ने 26 नवंबर 2016 को सर्वसम्मति से इराक़ स्वयंसेवियों या हश्दुश्शाबी को आधिकारिक रूप में देश की सेना का भाग घोषित किया।  इराक़ के दाइश नियंत्रित क्षेत्रों में जहां कहीं भी हश्दुश्शाबी ने भाग लिया, दाशइ को मुंह की खानी पड़ी।  इसका खुला उदाहरण, मूसिल अभियान था।