तलअफ़र की स्वतंत्रता, अमरीका और आतंकवादियों की बड़ी पराजय
इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबदी ने एक सप्ताह के भीतर तलअफ़र से तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश का पूर्ण सफ़ाया करके दुनिया को हैरान कर दिया है। तलअफ़र क्षेत्रफल के अनुसार बग़दाद के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर या कुछ अन्य शोधकर्ताओं की दृष्टि में बग़दाद और मूसिल के बाद देश का तीसरा बड़ा शहर समझा जाता है।
तलअफ़र पिछले सप्ताह रविवार को जब इराक़ी प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने तलअफ़र की स्वतंत्रता के लिए भरपूर अभियान आरंभ करने का आदेश जारी किया तो कुछ हल्क़े इस बारे शंका व्यक्त कर रहे थे कि इतने कम समय में यह सफलता प्राप्त की जा सकती है या नहीं। उनकी नज़र में तलअफ़र शहर की पूर्ण स्वतंत्रता में कम से कम दो महीने लगेंगे। वह कई कारणों से तलअफ़र अभियान को मूसिल आप्रेशन से मिलता जुलता बता रहे थे।
एक अन्य रोचक बात यह है कि इराक़ी सेना ने दुश्मन को निश्चेत करके अचानक हमला करने की पॉलिसी नहीं चुनी बल्कि आप्रेशन से पहले हवाई जहाज़ के माध्यम से तलअफ़र शहर पर पम्फ़्लेट गिराए गये जिनमें स्थानीय शहरियों और इसी प्रकार आतंकवादी तत्वों को सचेत किया गया। इन पंफ़्लेट्स पर लिखा थाः “तलअफ़र में तकफ़री आतंकवादियों के विरुद्ध आप्रेशन निर्णायक होगा इसीलिए आवश्यक है कि स्थानीय लोग इसके लिए मन से तैयार हो जाएं”। यह कार्यवाही इस बात का चिन्ह है कि इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बलों ने आपस में पूर्ण सहयोग और समन्वय द्वारा एक निर्धारित योजना के अंतर्गत इस आप्रेशन को आरंभ किया और उनका उद्देश्य मूसिल अभियान के विपरीत कम से कम समय में राष्ट्र को अंतिम विजय की बधाई पेश करना था।
कुछ हल्क़ों की भविष्यवाणी के विपरीत तलअफ़र शहर की स्वतंत्रता के लिए शुरु किया गया आप्रेश्न इतने कम समय में किसी प्रकार सफल हो गया? इस महा सफलता के मुख्य कारण पिछले कुछ महीनों के दौरान तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश से संबंधित तत्वों की निरंतर पराजय, इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बलों में अनुदाहरणीय सहयोग और एकता तथा इराक़ी सरकार की ओर से हश्शदुश्शाबदी को इस आप्रेशन में शामिल न करने पर आधारित अमरीकी आदेशों पर ध्यान न देने पर आधारित हैं। वास्तव में इराक़ी प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी का परिस्थितियों को सही ढंग से समझने और अमरीका के जो स्वयं सेवी बलों के भीषण विरोधियों में से है, दबदबे में न आने के कारण ही यह महा सफलता संभव हुई है। इसीलिए आतंकवादी तत्वों के पस्त हौसले, इराक़ी सेना के वरिष्ठ कमान्डरों की ओर से आप्रेश्न के भरपूर और निर्णायक होने पर बल और अमरीका की ओर से दाइश के बाक़ी रहने की ओर से निराशा के कारण तलअफ़र शहर में सफलता इतनी कम अवधि में संभव हो सकी।
इसमें कोई संदेह नहीं कि अमरीका शीघ्र अपने होने वाले बड़े नुक़सान से अवगत हो चुका था इसीलिए उसने आख़िरी कोशिश के रूप में इराक़ी स्वयं सेवी बलों को हवाई हमले का निशाना बनाया ताकि इस प्रकार तलअफ़र से तकफ़ीरी आतंकवादियों के फ़रार होने का मार्ग प्रशस्त करके उन्हें निश्चित तबाही से मुक्ति दिला सके। इराक़ी सेना के लिए तलअफ़र का रणनैतिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह शहर सीमावर्ती त्रिकोण के बीच स्थित है। ऐसा सीमावर्ती त्रिकोण जो सीरिया, इराक़ और तुर्की पर आधारित है। तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश ने 2014 में तलअफ़र शहर पर नियंत्रण करने के बाद रणनैतिक स्थिति से भरपूर लाभ उठाया और इस अवधि में इन तीनों देशों में आवाजाही के लिए इस शहर को प्रयोग किया गया। तलअफ़र की उचित रणनैतिक स्थिति की सहायता से तकफ़ीरी आतंकवादी सीरिया और इराक़ की सीमा पर अंजाम पाने दी जाने वाली इराक़ी सेना और सीरियाई सेना की समस्त गतिविधियों पर नज़र रखे हुए थे।
इसके अतिरिक्त तलअफ़र सीरिया के शहर रक़्क़ा के बीच संपर्क रास्ता भी इस शहर की महत्वपूर्ण रणनैतिक विशेषता समझा जाता है। अब तलअफ़र की स्वतंत्र के परिणाम में इराक़ और सीरिया में सक्रिय आतंकवादियों के बीच संपर्क टूट गया है और वह एक दूसरे की सामरिक सहायता के योग्य नहीं रहे। तलअफ़र की स्वतंत्रता से सीरिया और इराक़ की सीमा पर स्थित 200 किलोमीटर क्षेत्र भी स्वतंत्र करवाने का रास्ता भी खुल गया है और अब इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बलों का अगला लक्ष्य इस सीमावर्ती क्षेत्रों से आतंकवादी तत्वों को खदेड़ना होगा। निम्नलिखित दो बिन्दु तलअफ़र की स्वतंत्रता में सबसे महत्वपूर्ण हैंः
1 – इसमें कोई संदेह नहीं है कि मूसिल से तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश के सफ़ाए के बाद अमरीका को बड़े नुक़सान और पराजय से दोचार होना पड़ा था। इसके बाद अमरीका ने पक्का इरादा कर लिया था कि वह हर क़ीमत पर तलअफ़र में दाइश को विनाश से बचा लेगा किन्तु इराक़ में अमरीका की सैन्य उपस्थिति का एकमात्र बहाना दाइश की उपस्थिति है, इसीलिए अमरीकी अधिकारियों ने पूरी कोशिश की कि पहले इराक़ी प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी की ओर से तलअफ़र आप्रेशन का आदेश जारी न हो किन्तु जब उसने देखा कि इराक़ी सरकार और प्रधानमंत्री देश से दाइश के सफ़ाए का मज़बूत इरादा कर चुके हैं तो अमरीकी अधिकारियों ने इराक़ी अधिकारियों पर दबाव डालना आरंभ कर दिया कि तलअफ़र की स्वतंत्रता के लिए होने वाले आप्रेशन में स्वयं सेवी बल हशदुश्शाबी को शामिल न किया जाए। जब उसकी इस मांग की भी अनदेखी कर दी गयी तो उसने क्रोध में आकर स्वयं सेवी बलों को हवाई हमले का निशाना बनाया, इसीलिए अब जबकि तलअफ़र पूर्ण रूप से दाइश के नियंत्रण से स्वतंत्र हो चुका है तो यह कहना सही होगा कि इस आप्रेशन के परिणाम में सबसे बड़ी पराजय और विफलता का सामना अमरीका को करना पड़ा है।
2 – अमरीका और आतंकवादी तत्वों की विफलता के मुक़ाबले में वास्तविक विजय इराक़ी सरकार को प्राप्त हुई है। इराक़ी सरकार ने मूसिल और तलअफ़र की स्वतंत्रता के लिए अंजाम पाने वाले अभियानों में स्वयं सेवी बलों को शामिल न करने के लिए अमरीकी दबाव को सिरे से ख़ारिज कर दिया। इस प्रकार इराक़ी सरकार ने पूरी शक्ति से अपनी इस मूल्यवान पूंजी की रक्षा की और इराक़ी सेना और स्वयं सेवी बलों के बीच एकता द्वारा देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित किया। यह कार्यवाही वास्तव में इराक़ी सरकार और राष्ट्र की ओर से विदेशियों विशेषकर अमरीकी सेना को देश से निकाल बाहर करने और अपने पैरों पर खड़े होकर देश की सुरक्षा स्थिति को स्वयं बेहतर बनाने के संकल्प के मार्ग में पहला क़दम समझा जाता है। (AK)
* पार्स टूडे का लेखक के विचारों से सहमत होना आवश्यक नहीं है *