इस्राईली इंटैलीजेन्स अपना मज़ाक़ ख़ुद उड़वा रही है
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह की सीरिया यात्रा का मुद्दा इस्राईली इंटैलीजेन्स की बड़ी बेइज़्ज़ती का कारण बन गया है।
इस्राईली इंटैलीजेन्स के सूत्रों के हवाले से इस्राईली अख़बार यदीऊत अहारोनोत में रिपोर्ट प्रकाशित हुई कि हिज़्बुल्लाह प्रमुख ने हालिया दिनों सीरिया का जो ख़ुफ़िया दौरा किया उस पर इस्राईली इंटेलीजेन्स की नज़र थी और इस्राईली इंटेलीजेन्स को जानकारी थी कि वह कब बैरूत से निकले और किस रास्ते से दमिश्क़ पहुंचे। इस्राईली इंटैलीजेन्स ने कहा कि इस यात्रा में सैयद हसन नसरुल्लाह मज़दूर की वेशभूषा में थे।
इस्राईली इंटेलीजेन्स के सूत्रों से मीडिया में यह ख़बर तब आई जब इससे कुछ दिन पहले सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में घोषणा की कि उन्होंने सीरिया की यात्रा की और राष्ट्रपति बश्शार असद से मुलाक़ात में आतंकियों के विरुद्ध सैनिक आप्रेशन के बारे में विचार विमर्श किया। इस घोषणा के बाद इस्राईली इंटेलीजेन्स का मज़ाक़ उड़ने लगा क्योंकि उसका दावा है कि इस्राईली आंखें पूरे क्षेत्र में होने वाली सभी गतिविधियों पर रहती हैं और ज़मीन पर चींटी की हरकत भी उसकी नज़र से बच नहीं सकती।
इस्राईली इंटेलीजेन्स ने अपनी झेंप मिटाने के लिए सूत्रों के हवाले से मीडिया को यह ख़बर लीक की कि सैयद हसन नसरुल्लाह की यह यात्रा उसकी नज़र में थी लेकिन चूंकि सैयद हसन नसरुल्लाह उसकी हिट लिस्ट में नहीं हैं अतः उसने कोई कार्यवाही नहीं की। सवाल यह है कि जिस इस्राईली इंटेलीजेन्स ने हिज़्बुल्लाह के पूर्व प्रमुख सैयद अब्बास मूसवी को 1992 में दक्षिणी लेबनान के जबशीत शहर में उनकी गाड़ी पर मिसाइल करके शहीद कर दिया। जिसने हिज़्बुल्लाह की सैनिक शाखा के प्रमुख एमाद मुग़निया की टारगेट किलिंग करवाई इसी तरह अनेक लेबनानी व फ़िलिस्तीनी अधिकारियों को शहीद किया वह कैसे सैयद हसन नसरुल्लाह को अपनी हिट लिस्ट से बाहर निकाल सकती है जबकि इस्राईल की अगर आज नींद हराम है तो उसका कारण केवल हिज़्बुल्लाह के मिसाइल नहीं बल्कि हिज़्बुल्लाह के जियाले सैनिक और उसका नेतृत्व है।
अगर इस्राईली इंटेलीजेन्स को इस यात्रा की भनक लगी होती और वास्तव में उसकी हिट लिस्ट में सैयद हसन नसरुल्लाह का नाम न होने के कारण उसने कोई कार्यवाही न की होती तो इस बात की घोषणा वह पहले ही कर देती। यह न होता कि पहले सैयद हसन नसरुल्लाह अपनी इस यात्रा का उल्लेख अपने भाषण में करें तब इस्राईली इंटेलीजेन्स मीडिया को ख़बर लीक करे कि उसे इस यात्रा की ख़बर थी।
सैयद हसन नसरुल्लाह की दमिश्क़ यात्रा अंजाम पा जाना और उसकी भनक इस्राईली इंटेलीजेन्स को न लगना अपने आप में लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन की एक कामयाबी तथा इस्राईली इंटैलीजेन्स की बहुत बड़ी विफलता है।