बहरैन, आले ख़लीफ़ा शासन की आलोचना करने का परिणाम
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एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी करके कहा कि आले ख़लीफ़ा शासन अपने आलोचकों को यथावत गिरफ़्तार करने और उनके यातनाए दिए जाने का क्रम जारी रखे हुए है।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Sep ०७, २०१७ ११:११ Asia/Kolkata
  • बहरैन, आले ख़लीफ़ा शासन की आलोचना करने का परिणाम

एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी करके कहा कि आले ख़लीफ़ा शासन अपने आलोचकों को यथावत गिरफ़्तार करने और उनके यातनाए दिए जाने का क्रम जारी रखे हुए है।

एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आले ख़लीफ़ा शासन के अधिकारी, बहरैन के नागरिक समाज को बर्बाद करने के लिए हर प्रकार की शैली का प्रयोग कर रहे हैं और यह कार्यवाही वर्ष 2017 में अपने चरम पर पहुंच गयी है।

इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने इस बात पर बल देते हुए कि बहरैन में राजनैतिक बंदियों को यातनाएं दिए जाने के बारे में गंभीर जांच की मांग करते हुए कहा कि विदेशों में रह रहे बहरैन के सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को आले ख़लीफ़ा शासन के अधिकारियों की ओर से धमकिया दी जाती हैं और परेशान किया जाता है।

बहरैन, पश्चिमी एशिया का एक छोटा सा देश है जो मानवाधिकार सूत्रों के अनुसार राजनैतिक बंदियों का सबसे बड़ा जेल बन चुका है। यह एेसी स्थिति में है कि बहरैन के राजनैतिक कार्यकर्ताओं को जिन जेलों में बंद किया गया है उनकी हालात बहुत ही ख़राब हैं। बहरैन में विरोधियों के विरुद्ध हिंसाओं के बारे में एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल सहित विभिन्न पश्चिमी संस्थाओं की देर से आने वाली प्रतिक्रिया एेसी स्थिति में है कि बहरैन का आले ख़लीफ़ा शासन यूरोपीय सरकारों सहित पश्चिमी सरकारों के समर्थन के साएे में अपने विरोधियों का दमन करने में व्यस्त है।

बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 से देश में राजनैतिक सुधार की मांग को लेकर निरंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहे हैं। बहरैनी नागरिकों की मांग है कि देश में न्याय की स्थापना हो, स्वतंत्रता बहाल हो और जनता द्वारा निर्वाचित सरकार का गठन हो। आले ख़लीफ़ा शासन, जनता की मांगों पर ध्यान देने के बजाए जनता का व्यापक स्तर पर दमन कर रहा है और उसने व्यापक स्तर पर सरकार विरोधियों को गिरफ़्तार करके विभिन्न यातनाएं देने का क्रम जारी रखा है।

बहरैनी शासन ने जनता का दमन करके तथा मानवाधिकारों का व्यापक हनन करके देश को दुनिया के एक बड़े जेल में बदल कर रख दिया है। बहरहाल बहरैनी शासन को यह जान लेना चाहिए कि जनता की मांगों को कभी भी दबाया नहीं जा सकता और बहरैन की जनता ने भी अपनी मांगों के पूरा होने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को जारी रखने पर बल दिया है। (AK)