इस्राईली हमले पर क्यूं ख़ामोश रह गए सीरिया, ईरान और रूस?
इस्राईल ने गत गुरुवार को सीरिया में रक्षा अनुसंधान के एक केन्द्र पर हमला किया तो न तो रूस की ओर से इस पर कोई बयान आया और न न ही सीरिया की सेना ने जवाबी हमले की धमकी दी। हालांकि इससे पहले इस्राईली हमलों के बाद सीरिया की ओर से धमकी ज़रूर दी जाती थी।
इसकी वजह यह है कि इस्राईल के हमले का जवाब देना इस समय सीरिया की प्राथमिकता नहीं है क्योंकि सीरिया और उसके घटक इस समय दैरुज़्ज़ूर क्षेत्र को आतंकियों से आज़ाद करवाने में व्यवस्त हैं और उन्होंने दाइशी आतंकियों द्वारा की गई घेराबंदी तोड़ कर बड़े भागों को आज़ाद भी करवा लिया है।
इस्राईल के हमले की उपेक्षा कर देने का यह मतलब कदापि नहीं है कि इस हमले से सीरिया और रूस नाराज़ नहीं हैं। इस लिए कि यह हमला संप्रभुता का उल्लंघन और अपमानजनक कार्यवाही है। इस्राईल ने हमला इस लिए किया था कि इस पर सीरिया बरबस कोई जवाबी कार्यवाही कर दे और परिस्थितियों का रुख़ किसी और तरफ़ मुड़ जाए। सीरिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया भी है कि सीरियाई सरकार के पास प्राथमिकताओं की सूची है।
इस्राईल के पूर्व वायु सेना अधिकारी जनरल ईशेल ने कहा कि इस्राईली विमानों ने हालिया वर्षों में सीरिया के भीरत 100 हमले किए। इन हमलों में सीरिया से हिज़्बुल्लाह को भेजी जाने वाली आधुनिक मिसाइलों की खेपों को निशाना बनाया गया। यह हमले तो हुए लेकिन आज नतीजा यह है कि इस्राईल यह मिसाइल हिज़्बुल्लाह तक पहुंचने से नहीं रोक आया। आज एक अनुमान के अनुसार हिज़्बुल्लाह के पास सटीक निशाने वाले और अलग अलग दूरी की मार करने वाले डेढ़ लाख से अधिक मिसाइल मौजूद हैं। यह अनुमान इस्राईली अधिकारियों ने लगाया है।
सीरिया पर इस्राईल ने 100 हमले किए लेकिन सीरिया अपनी जगह पर है और आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में लगातार सफलताएं प्राप्त कर रहा है। सीरिया के साथ ही हिज़्बुल्लाह की ताक़त भी लगातार बढ़ती जा रही है।
हमें यह विश्वास है कि सीरिया, ईरान और रूस की ओर से जवाबी हमला ज़रूर होगा। चाहे यह हमला सीरिया के भीतर से हो या लेबनान की सीमा के भीतर से किया जाए। इस लिए कि इस्राईली विमानों ने यह हमला सीरिया पर किया और इसके लिए लेबनान की वायु सीमा का प्रयोग किया। इससे यह भी साबित हो गया कि इस्राईली विमानों के पास सीरिया की वायु सीमा में प्रवेश करने की हिम्ममत अब नहीं रह गई है इस लिए कि वहां रूस और सीरिया के आधुनिक वायु रक्षा सिस्टम स्थापित हो चुके हैं।
दमिश्क़ में अमरीका के पूर्व राजदूत राबर्ट फ़ोर्ड और सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत स्टीफ़न दी मिस्तूरा जैसे विशेषज्ञ बार बार कह रहे हैं कि सीरियाई सरकार वर्तमान संकट से विजयी होकर बाहर निकल रही है और अब सीरियाई, ईरानी रूसी गठबंधन सीरिया ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में बहुत ताक़तवर हो गया है। सीरिया में यदि अमरीकी गठबंधन को पराजय मिली है तो यह इस्राईल की भी पराजय है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के प्रख्यात लेखक व टीकाकार