इराक़ी कुर्दिस्तान के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाने की अर्दोग़ान की धमकी
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने 22 सितंबर 2017 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन में एक बार फिर इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र को इस देश से अलग करने से संबंधित 25 सितंबर को प्रस्तावित रेफ़्रेन्डम के आयोजन पर तुर्की के विरोध पर बल दिया और इराक़ी कुर्दिस्तान के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाने की बात कही।
अर्दोग़ान ने इन पाबंदियों के जल्द से जल्द लगने पर तो बल दिया लेकिन ये पाबंदियां किस तरह की होंगी, इस बारे में कुछ नहीं कहा।
इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र की ओर से इस क्षेत्र को इराक़ से अलग करने के लिए रेफ़्रेन्डम के आयोजन पर बल दिए जाने पर इराक़ सरकार, इराक़ के अनेक राजनैतिक दलों और क्षेत्रीय देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी है।
दूसरी ओर अमरीका इस रेफ़्रेन्डम के आयोजन का समर्थन कर रहा है जिससे इस बात की संभावना है कि भविष्य में क्षेत्र में भौगोलिक व राजनैतिक दृष्टि से बदलाव आएंगे। अगर कुर्दिस्तान इराक़ से अलग हो गया तो इस क्षेत्र को तेल से हासिल होने वाली अत्याधिक आय के मद्देनज़र, अमरीका इस क्षेत्र में अपनी छावनी बना सकता है और इस बात के मद्देनज़र कि यह क्षेत्र पश्चिम एशिया में बहुत ही संवेदनशील भाग में स्थित है, भविष्य में क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है और ईरान व तुर्की के लिए ख़तरे पैदा हो सकते हैं।
इराक़, तुर्की और सीरिया के कुर्दों सहित क्षेत्र के कुर्दों के संबंध में वॉशिंग्टन के व्यवहार के मद्देनज़र जो हालात हैं उनसे लगता है कि अमरीका को अपने पुराने व मौजूदा घटकों के हितों की कोई परवाह नहीं है बल्कि वह संकट पैदा करने और क्षेत्र के देशों को इस संकट में फंसा कर, स्थिति से ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाना चाहता है। यही वजह है कि कुछ मीडिया हल्क़े कह रहे हैं कि अगर यह प्रक्रिया वजूद में आ गयी तो वर्ष 1916 में हुआ साइक्स पीको समझौता फिर से वजूद में आएगा और पश्चिम एशिया में तनाव का एक नया दौर शुरु हो जाएगा। (MAQ/T)