फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद से नहीं निकलेंगेः क़तर
क़तर के विदेशमंत्री ने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि उनका देश फ़ार्स की खाड़ी की सुरक्षा पर प्रतिबद्ध है, फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद से क़तर के निकलने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
अश्शरक़ समाचार पत्र ने लिखा है कि क़तर के विदेशमंत्री मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी ने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि क़तर का परिवेष्टन करने व९ाले देशों ने फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन किया है, इसके बावजूद उनका देश फ़ार्स की खाड़ी की सुरक्षा पर प्रतिबद्ध है।
क़तर के विदेशमंत्री ने कहा कि फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों की संप्रभुता के सम्मान और दूसरे देशों को नीतियां डिक्टेट करने से बचने के उद्देश्य से इस परिषद के नियमों और सिद्धांतों में बदलाव की आवश्यकता है।
क़तर के विदेशमंत्री मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी ने कहा कि दोहा, देश का परिवेष्टन करने वाले देशों से बिना पूर्व शर्त वार्ताके लिए तैयार है। उनका कहना था कि क़तर का घेराव करने वाले देशों ने दोहा के सामने दो 13 शर्तें रखी थीं वह शर्तें क़तर को स्वीकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले क़तर का परिवेष्टन समाप्त होना चाहिए।
ग़ौरतलब है कि हाल ही में क़तर और फ़ार्स खाड़ी के कुछ देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद संकट का रूप धारण कर गया था और क़तर के पड़ोसी इन देशों ने उसके ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे।
सऊदी अरब के नेतृत्व में इन देशों ने प्रतिबंध समाप्त करने और संबंधों को सामान्य करने के लिए क़तर के सामने 13 शर्तें रखी थीं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, बहरैन और मिस्र ने 5 जून 2017 को क़तर से अपने कूटनयिक संबंध तोड़ लिए थे और इस देश का ज़मीनी, हवाई और समुद्री परिवेष्टन कर रखा है। (AK)