बहरैन, आज़ादारों पर फिर हमले, सुरक्षा बलों ने हुसैनी बैनर हटाए
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बहरैन के अलवफ़ा अल इस्लामी धड़े ने बहरैनी शासन द्वारा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिसों में शामिल लोगों और सबीलों पर अंधाधुंध हमले की निंदा की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep ३०, २०१७ १७:१२ Asia/Kolkata
  • बहरैन, आज़ादारों पर फिर हमले, सुरक्षा बलों ने हुसैनी बैनर हटाए

बहरैन के अलवफ़ा अल इस्लामी धड़े ने बहरैनी शासन द्वारा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिसों में शामिल लोगों और सबीलों पर अंधाधुंध हमले की निंदा की है।

बहरैन में नवीं और दसवीं मुहर्रम के कार्यक्रम के शुरु होते ही बहरैनी सुरक्षा बलों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में शोक सभाओं और सबीलों पर हमले करके अलमों और हुसैनी बैनरों को हटा दिया। बहरैनी प्रशासन ने इससे पहले इमाम बाड़ों के ज़िम्मेदारों को तलब करके उन्हें धमकी दी थी कि शोक सभाओं और कार्यक्रमों में वरिष्ठ शिया धर्म गुरु शैख़ ईसा क़ासिम का नाम न लिया जाए।

मनामा पोस्ट ने रिपोर्ट दी है कि बहरैन के क्रांतिकारी धड़े अलवफ़ा अल इस्लामी ने एक बयान जारी करके इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के अज़ादारों और हुसैनी बैनरों और अलमों को सुरक्षा बलों द्वारा उखाड़ कर फेंके जाने, अलख़ाजा मस्जिद को बंद करने और इस मस्जिद में एक साथ नमाज़ पढ़ने से रोके जाने की निंदा की है।

इस बयान में आया है कि आले ख़लीफ़ा मस्जिद पर ताले लगाकर एक साथ नमाज़ पढ़ने और आशूर की रात इस मस्जिद में शोक सभा के आयोजन को रोकना चाहता है। बयान में कहा गया है कि बहरैनी प्रशासन, यज़ीद का समर्थक है और इसीलिए बहरैन में जो लोग भी हुसैनी मार्ग पर चल रहे हैं उनको प्रशासन की इन कार्यवाहियों पर प्रतिरोध करना चाहिए।

बहरैन के इस क्रांतिकारी धड़े ने इसी प्रकार राजधानी मनामा के विभिन्न स्क्वायर्स पर बड़ी संख्या में हुसैनी अज़ादारों की उपस्थिति और शोक सभाओं के आयोजन तथा अज़ादारी पर लगे समस्त प्रतिबंधों को तोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया है।

ज्ञात रहे कि बहरैनी प्रशासन 63 सप्ताह से लगातार मनामा के दुराज़ क्षेत्र का परिवेष्टन जारी रखे हुए और इस क्षेत्र में शिया मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने की अनुमति नहीं दे रहा है। (AK)