बहरैन, दुराज़ क्षेत्र में जुमे की नमाज़ पर प्रतिबंध जारी
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बहरैन के आले ख़लीफ़ा शासन के सैनिकों ने निरंतर 64वें सप्ताह दुराज़ क्षेत्र और वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम के घर का परिवेष्टन जारी रखा है और इस क्षेत्र में जुमे की नमाज़ पर प्रतिबंध लगाए रखा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct ०६, २०१७ १९:५६ Asia/Kolkata
  • बहरैन, दुराज़ क्षेत्र में जुमे की नमाज़ पर प्रतिबंध जारी

बहरैन के आले ख़लीफ़ा शासन के सैनिकों ने निरंतर 64वें सप्ताह दुराज़ क्षेत्र और वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम के घर का परिवेष्टन जारी रखा है और इस क्षेत्र में जुमे की नमाज़ पर प्रतिबंध लगाए रखा।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार सैनिकों के परिवेष्टन का शिकार दुराज़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा नमाज़े जुमा पर रोक के बाद हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम नामक मस्जिद में नमाज़ी अकेले ही नमाज़ पढ़ने पर मजबूर हुए।

इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम नामक मस्जिद में नमाज़े जुमा सैकड़ों साल से आयोजित होती रही है और बहरैन की सत्ता पर आले ख़लीफ़ा शासन के क़ब्ज़े से पहले भी यहां के स्थानीय लोग पूरी स्वतंत्रता से इस मस्जिद में नमाज़ अदा करते रहे हैं।

बहरैनी सुरक्षा बलों ने 473 दिनों से दुराज़ क्षेत्र का घेराव कर रखा है कि जबकि इस देश के वरिष्ठ धर्म गुरु आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम को 137 दिनों से घर में नज़रबंद कर रखा है।

बहरैन के तानाशाही शासन ने पिछले वर्ष जून के महीने में वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द कर दी थी और उन पर मुक़द्दमा आरंभ कर दिया था। शैख़ ईसा क़ासिम दुराज़ क्षेत्र के निवासी हैं और तब से सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र का परिवेष्टन कर रखा है।

बहरैनी सुरक्षा बलों ने कुछ दिन पहले सरकार विरोधी प्रदर्शन करने और शैख़ ईसा क़ासिम के घर की ओर मार्च करने के कारण कुछ युवाओं को गिरफ़्तार कर लिया था।

ज्ञात रहे कि बहरैन में 2011 से आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस शासन ने जून 2016 को बहरैन के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू शेख ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द कर दी थी।  जून 2016 से वे अपने घर में नज़रबंद हैं। (AK)