बग़दाद के घेरे में अलगाववादी, वरिष्ठ कमांडर की शानदार कूटनीति, 
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सन 2003 के बाद यह पहला अवसर है कि बग़दाद सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण पहल की है। बड़ी सफ़ाई से इराक़ी बलों ने करकूक का कंट्रोल संभाल लिया है, यह इस लिए संभव हो सका कि इराक़ी कुर्दिस्तान के नेता मसऊद बारेज़ानी ने अलगाववाद की अत्यतं ग़लत नीति अपनाई और दूसरी ओर ईरान और तुर्की ने इस अलगाववादी योजना को रोकने का पक्का इरादा कर लिया था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct १७, २०१७ १४:५७ Asia/Kolkata
  • बग़दाद के घेरे में अलगाववादी, वरिष्ठ कमांडर की शानदार कूटनीति, 

सन 2003 के बाद यह पहला अवसर है कि बग़दाद सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण पहल की है। बड़ी सफ़ाई से इराक़ी बलों ने करकूक का कंट्रोल संभाल लिया है, यह इस लिए संभव हो सका कि इराक़ी कुर्दिस्तान के नेता मसऊद बारेज़ानी ने अलगाववाद की अत्यतं ग़लत नीति अपनाई और दूसरी ओर ईरान और तुर्की ने इस अलगाववादी योजना को रोकने का पक्का इरादा कर लिया था।

यह सफलता बग़दाद के नाम गई जो उसे तेहरान के सक्रिय सहयोग से हासिल हुई और जिसमें बड़ी केन्द्रीय भूमिका ईरान की अलक़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की रही। बग़दाद ने इस समय अलगाववादियों को घेर लिया है औज्ञ यह भी ज़ाहिर हो गया कि जनमत संग्रह के संबंध में सहमति नहीं थी। करकूक में जो कुछ हुआ उससे यह भी तय हो गया कि बग़दाद सरकार औज्ञ इसी तरह इराक़ के पड़ोसी देश मसऊद बारेज़ानी के अलगाववादी अभियान को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मसऊद बारेज़ानी की यह नीति थी कि इराक़ी फ़ोर्सेज़ और पीशमर्गा फ़ोर्स के बीच टकराव हो जाए ताकि वह दुनिया को यह बता सकें कि अलगाववाद की उनकी मांग बिलकुल दुरुस्त है। जानकार सूत्रों का यह भी कहना है कि इस योजना के संबंध में बारेज़ानी के साथ अमरीकी, फ़्रांसीसी, सऊदी और इमाराती अधिकारियों की पहले ही सांठगांठ हो चुकी थी। योजना यह थी कि करकूक के साथ ही दियाली, सलाहुद्दीन, अरबील और नैनवा क्षेत्रों में भी झड़पें होतीं जिनमें जाली नुक़सान का प्रोपैगंडा किया जाता और फिर मसऊद बारेज़ानी विश्व समुदाय से यह मांग करते कि इराक़ से अलग होने में उनकी मदद करे। मगर करकूक में जो हालात नज़र आए उनसे यह सवाल पैदा हो रहे हैं कि जनरल क़ासिम सुलैमानी और हैदर अलएबादी ने कितनी सफलता और सूझबूझ से अपना रोल निभाया। सूत्र बताते हैं कि हैदर अलएबादी ने मसऊद बारेज़ानी से निपट लेने का फ़ैसला कर लिया था जबकि इस बीच जनरल क़ासिम सुलैमानी ने बड़े आश्चर्यजनक रूप से कुर्द घटकों को बचाया।

इराक़ के कुर्द और ग़ैर कुर्द इस बात पर एकमत हैं कि करकूक पर इराक़ी फ़ोर्सेज़ का कंट्रोल तेहरान और कुछ कुर्द संगठनों के बीच सहमति से ही संभव हो पाया है। यह कुर्द नेताओं से जनरल क़ासिम सुलैमानी की हालिया मुलाक़ातों का नतीजा था। कुर्दिस्तान की पीशमर्गा फ़ोर्स के कुछ हिस्सों का मोर्चे से पीछे हट जाना बताता है कि अलगाववाद के मामले में कुर्दों में आम सहमति नहीं थी। ख़ुद मसऊद बारेज़ानी की पार्टी के भीतर भी यह शिकायत है कि वह बारेज़ानी मनमानी कर रहे हैं। मसऊद बारेज़ानी ने कुछ कुर्द संगठनों पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। अब यह सवाल है कि क्या बग़दाद सरकार करकूक पहुंचने के बाद अपनी फ़ोर्सेज़ को आगे बढ़ने से रोक देगी या अन्य इलाक़ों का कंट्रोल भी कुर्द फ़ोर्सेज़ से अपने हाथ में लेगी।

हैदर अलएबादी का पहला लक्ष्य बारेज़ानी को घेरना और अलगाववाद के विचार को छोड़ देने पर मजबूर करना है, दूसरा लक्ष्य विवादित इलाक़ों पर इराक़ी फ़ोर्सेज़ का संपूर्ण कंट्रोल है और तीसरा लक्ष्य देश के भीतर विभिन्न संगठनों और देश के बाहर क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों को यह संदेश देना है कि इराक़ एकजुट रहेगा औज्ञ ईरान का रोल इसी तरह बहुत महत्वपूर्ण रहेगा।

साभार अलअख़बार