सीरिया संकट में आए नये मोड़ पर एक नज़र
सीरिया संकट, पश्चिमी एशिया के परिवर्तनों में सबसे महत्वपूर्ण समझा जाता है। ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि रक़्क़ा प्रांत में अमरीका की सैन्य कार्यवाही से इस संकट में नया मोड़ आ गया है।
अमरीका समर्थित सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्स द्वारा आतंकवादी गुट दाइश से रक़्क़ा की स्वतंत्रता के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक बयान जारी करके कहा कि जल्द ही हम नये चरण में दाख़िल होंगे और स्थानीय सुरक्षा तंत्र का समर्थन करेंगे। इसी के साथ वाशिंग्टन ने रक्क़ा के पुनर्निमाण के लिए वित्तीय सहायता का आश्वासन भी दे दिया जिनसे क्षेत्र में अमरीका के भविष्य के कार्यक्रमों का पता चलता है।
22 अक्तूबर को रूस के रक्षामंत्रालय के प्रवक्ता जनरल इगोर कोशान्कोव ने कहा कि इस शहर का हाल वर्ष 1945 के जर्मनी के शहर ड्रस्डन का हो गया है जो मानचित्र से पूरी तरह मिट चुका है। यहां पर आपको यह भी बताते चले कि पूर्वी जर्मनी में स्थित एेतिहासिक शहर ड्रस्डन 1945 में अमरीका और ब्रिटेन की तीन दिनों तक जारी बमबारी में पूरी तरह तबाह हो गया जिसमें दसियों हज़ार लोग मारे गये। मारे गये अधिकतर लोग आम नागरिक थे।
रूस के रक्षामंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि रक़्क़ा में हवाई हमलों के दौरान 1130 से अधिक आम नागरिक मारे गये हैं, कहा कि अमरीका और पश्चिम जल्दबाज़ी में इस शहर में सहायता इसलिए पहुंचाना चाहते हैं ताकि वह इस शहर में अमरीका के पाश्विक हमलों के चिन्ह मिटा सकें और इस शहर में हुए अपराधों और अत्याचारों की ओर से जनमत का ध्यान मोड़ सकें।
यह एेसी स्थिति में है कि पश्चिमी और अरब सरकारें, सीरिया की क़ानूनी सरकार के विरुद्ध आतंकवादी और सरकार विरोधी गुटों की सहायताएं और उन्हें सूचनाएं दे रहे हैं और सीरिया के दो महत्ववपूर्ण शहर हलब और दैरिज़्ज़ूर की स्वतंत्रता के विषय पर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर केन्द्रित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि सीरिया की क़ानूनी सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाने का प्रयास करें। पश्चिमी और अरब सरकारों ने इन दोनों शहरों की स्वतंत्रता के दौरान दुनिया को यह दिखाने का प्रयास किया कि सीरिया की सेना आम नागरिकों को मार रही है जबकि दुनिया को पता है कि यही लोग सीरिया सरकार की प्रगति और आतंकवादियों को पराजय से रोकने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं।
दूसरी ओर कुर्दों ने यह जानते हुए कि दाइश से रक़्क़ा को स्वतंत्र करान की कार्यवाही बहुत कठिन होगी, इस युद्ध में कूद पड़े। उनको पता था कि रक़्क़ा शहर में बाक़ी रहना और इस शहर में शांति स्थापित करना बहुत कठिन और ख़र्चीला है क्योंकि दाइश के तत्व क्षेत्र में मौजूद हैं और यह एक अंतर्राष्ट्रीय संवेदनशील क्षेत्र है और यही कारण है कि सीरिया के कुर्द विशेष लक्ष्य के अंतर्गत रक़्क़ा में बाक़ी रहने के प्रयास में हैं। कुर्दों का पहला लक्ष्य है कि अमरीका की ओर से दिए गये हथियारों और उनकी सहायताओं से भरपूर लाभ उठाएं जबकि दूसरा लक्ष्य सीरिया के कुर्दों का यह है कि सीरिया के बारे में जेनेवा वार्ता में वह पक्ष के रूप में भाग लें। (AK)