बालफ़ोर घोषणापत्र के ख़िलाफ़ हज़ारों फ़िलिस्तीनियों का रामल्ला में प्रदर्शन
अतिग्रहित फ़िलिस्तीन के रामल्लाह शहर में हज़ारों की संख्या में फ़िलिस्तीनियों ने बालफ़ोर घोषणापत्र के 100 साल पूरे होने पर इस घोषणापत्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया कि यही घोषणापत्र फ़िलिस्तीन में इस्राईल नामी एक अवैध शासन के वजूद में आने का कारण बना।
संवाददाता के अनुसार, गुरुवार को हज़ारों की संख्या में फ़िलिस्तीनियों ने रामल्ला शहर के केन्द्र से ब्रितानी वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च किया।
इसी तरह पूर्वी बैतुल मुक़द्दस और ग़ज़्ज़ा शहर में भी बालफ़ोर घोषणापत्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुआ।
दूसरी ओर फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के राजनैतिक कार्यालय के प्रमुख इस्माईल हनीया ने गुरुवार को ग़ज़्ज़ा में बालफ़ोर घोषणापत्र की निंदा में आयोजित एक बैठक में कहा कि हमास इस्राईल को कभी भी मान्यता नहीं देगा और फ़िलिस्तीन की एक इंच ज़मीन को भी नज़रअंदाज़ नहीं करेगा।
इस्माईल हनीया ने कहा कि जब तक सभी विस्थापित फ़िलिस्तीनी अपने वतन वापस नहीं आ जाते उस वक़्त तक इस्राईल के ख़िलाफ़ हमास का संघर्ष जारी रहेगा और इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उसने इस्लामी गणतंत्र ईरान, मिस्र, क़तर और तुर्की के साथ द्वार खुले रखने की नीति अपनायी है।
ग़ौरतलब है कि बालफ़ोर घोषणापत्र 1917 में तत्कालीन ब्रितानी विदेश मंत्री आर्थर जेम्ज़ बालफ़ोर ने ज़ायोनी राजनेता व ब्रितानी संसद हाउस आफ़ कामन्स के सदस्य वाल्टर रोथ्सचाइल्ड के नाम लिखा था। इस घोषणापत्र में एलान किया गया है फ़िलिस्तीन की भूमि पर इस्राईलियों के लिए एक राष्ट्रीय वतन बनाने का लंदन समर्थन करता है और इसी घोषणापत्र को अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन की स्थापना की कोशिश का आरंभिक बिन्दु समझा जाता है। (MAQ/N)