प्रतिरोधकर्ता धर्मगुरुओं की अंतर्राष्ट्रीय युनियन का सम्मेलन, नतीजे और लक्ष्य
https://parstoday.ir/hi/news/west_asia-i51773-प्रतिरोधकर्ता_धर्मगुरुओं_की_अंतर्राष्ट्रीय_युनियन_का_सम्मेलन_नतीजे_और_लक्ष्य
प्रतिरोधकर्ता धर्मगुरुओं की अंतर्राष्ट्रीय युनियन का दूसरा सम्मेलन लेबनान की राजधानी बैरूत में फ़िलिस्तीन के समर्थन में एक बयान जारी करके समाप्त हो गया। सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०३, २०१७ १६:५२ Asia/Kolkata

प्रतिरोधकर्ता धर्मगुरुओं की अंतर्राष्ट्रीय युनियन का दूसरा सम्मेलन लेबनान की राजधानी बैरूत में फ़िलिस्तीन के समर्थन में एक बयान जारी करके समाप्त हो गया। सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ था।

बयान में ज़ायोनी शासन के बलफ़ोर घोषणापत्र तथा ब्रिटेन की ओर से ज़ायोनियों की लगातार जारी मदद की आलोचना की गई। बयान में कहा गया कि अवैध रूप से हड़प ली गी गई फ़िलिस्तीनी ज़मीनों को आज़ाद कराने के ईश्वरीय वादे के पूरा होने का एक मात्र मार्ग प्रतिरोध का जारी रहना है और यही रास्ता फ़िलिस्तीन की आज़ादी और हड़पी गई ज़मानी की वापसी का रास्ता है।

बैरूत सम्मेलन में साठ से अधिक देशों के धर्मगुरुओं और हस्तियों ने भाग लिया इससे यह पता चलता है कि साज़िशों और ख़तरों से निपटने के लिए प्रतिरोध को एकमात्र उपयोगी समाधान मानने का रुजहान इस्लामी जगत के स्तर पर स्थापित हो चुका है। इस्लामी जगत के पिछले और वर्तमान परिवर्तनों को देखकर लगता है कि इस्लामी देशों ही नहीं दुनिया का दुशमन ज़ायोनी शासन और दाइश जैसे आतंकी संगठन हैं जिन्हें पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है और उनके गठन में पश्चिमी देशों ने प्रभावी भूमिका निभाई है। यह ज़मीनी सच्चाई है जिसे कुछ पश्चिमी अधिकारियों ने अपनी ज़बान से क़ुबूल भी किया है, यही नहीं कुछ पश्चिमी अधिकारी तो इस पर गर्व भी करते हैं। जैसे बलफ़ौर घोषणा पत्र को सौ साल पूरे होने पर लंदन में जश्न रखा गया जिसमें ब्रिटेन के वरिष्ठ अधिकारियों और इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने कहा कि ज़ायोनी शासन की स्थापना में अपने देश की भूमिका पर उन्हें गर्व है। बलफ़ौर घोषणापत्र वास्तव में मध्यपूर्व में ग़ैर क़ानूनी शासन इस्राईल की स्थापना की प्रक्रिया के लिए नींव का पत्थर है। टेरीज़ा मे ने इसे तत्कालीन ब्रिटिश विदेश मंत्री आर्थर जेम्ज़ बलफ़ौर का महत्वपूर्ण पहल का नाम दिया।

अलक़ायदा संगठन के गठन के मामले में भी अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन ने खुले शब्दों में कहा कि हमने अलक़ायदा का गठन किया, उसे आधुनिक हथियार दिए, उन्हें ट्रेनिंग दी और इस तरह अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में एक बड़ी समस्या को उसके हाल पर छोड़ कर हट गए।

इस तरह देखा जाए तो इस्लामी जगत के विरुद्ध पश्चिमी देशों ने बड़ी भयानक साज़िशें रची हैं। पश्चिमी सरकारों ने अलग अलग हथकंडों से यह कोशिश कर रही हैं कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा जनमत के ध्यान से हट जाए और क्षेत्र में दुनिया भर से आतंकियों को लाकर जमा कर देना इसी साज़िश का एक हिस्सा है।

इस बीच इस्राईल की विस्तारवादी नीतियों की दुनिया भर में जो निंदा हो रही है उससे पता चलता है कि विश्व जनमत का ध्यान फ़िलिस्तीन से हटाने की पश्चिमी सरकारों की साज़िश नाकाम हो चुकी है। ज़ायोनी शासन और तकफ़ीरी आतंकी संगठन दो अलग अलग तरीक़ों से इस्लामी जगत को कमज़ोर करने में लगे हुए हैं अतः ज़रूरी है कि इस्लामी जगत होश के नाख़ुन ले और साज़िशों से निपटे।

इस्लामी प्रतिरोध की विचारधारा तथा इस विचारधारा के आधार पर अस्तित्व में आने वाला मोर्चा इस्लामी जगत के विरुद्ध की जाने वाली साज़िशों को नाकाम बनाने में बहुत प्रभावी साबित हुआ है। अतः प्रतिरोधकर्ता धर्मगुरुओं की अंतर्राष्ट्रीय युनियन का सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण क़दम है।