शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में बहरैनियों का व्यापक प्रदर्शन
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बहरैन की जनता ने शुक्रवार की रात इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरू शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में प्रदर्शन किया। बहरैनी जनता ने अद्देराज़ इलाक़े में शैख़ ईसा क़ासिम के घर की नाकाबंदी ख़त्म करने और इस देश के राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई की मांग दोहरायी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०४, २०१७ १३:०२ Asia/Kolkata

बहरैन की जनता ने शुक्रवार की रात इस देश के वरिष्ठ धर्मगुरू शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में प्रदर्शन किया। बहरैनी जनता ने अद्देराज़ इलाक़े में शैख़ ईसा क़ासिम के घर की नाकाबंदी ख़त्म करने और इस देश के राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई की मांग दोहरायी।

बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 से इस देश में अत्याचारी शासन के ख़िलाफ़ जनता का प्रदर्शन जारी है। आले ख़लीफ़ा शासन ने जनता के विरोध को दबाने के लिए विपक्ष के बहुत से नेताओं को गिरफ़्तार और उनके ख़िलाफ़ झूठे केस बनाकर उन्हें लंबी अवधि की क़ैद की सज़ा दी है या उन्हें घर में क़ैद कर दिया है।

आले ख़लीफ़ा शासन एक धूर्ततापूर्ण चाल के तहत क़तर के साथ अपने मतभेद सहित हर अवसर को बहरैन की जनता के आंदोलन के नेताओं की छवि को ख़राब कर उनका दमन करने की कोशिश में है। बहरैन के राजनैतिक हल्क़े अभी हाल में इस देश की जमईयते वेफ़ाक़े मिल्ली पार्टी के महासचिव शैख़ अली सलमान के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप को आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा क़तर के साथ बहरैन के विवाद का हिसाब चुकता करने की दिशा में उठाया गया क़दम मान रहे हैं। आले ख़लीफ़ा शासन का क़तर के पूर्व प्रधान मंत्री हमद बिन जासिम और जमईयते वेफ़ाक़े मिल्ली पार्टी के महासचिव शैख़ अली सलमान की बातचीत के कुछ भाग को प्रसारित करना, इसी दृष्टि से समीक्षा योग्य है। यही वजह है कि बहरैन के राजनैतिक हल्क़े इस बात की मांग कर रहे हैं कि आले ख़लीफ़ा शासन शैख़ अली सलमान और हमद बिन जासिम के बीच पूरी बातचीत को प्रसारित करे ताकि देशी और विदेशी जनमत के निकट यह बात स्पष्ट हो जाए कि क़तर ने बहरैन के संकट के हल के लिए क्या क़दम उठाया था। बहरैनी शासन के निवेदन पर शैख़ अली सलमान और हमद बिन जासिम के बीच संपर्क क़ायम हुआ था और इस बातचीत में विरोधियों की ओर से शैख़ अली सलमान और शासन की ओर से बहरैनी युवराज भाग लेते थे।

बहरहाल आले ख़लीफ़ा शासन बहरैनी जनता और उसके नेताओं के बीच दूरी डालने के लिए हर हथकंडा अपना रही है लेकिन आले ख़लीफ़ा शासन के सुरक्षा व राजनीति के क्षेत्र में अनाड़ीपन से जारी खेल ने इस शासन के धूर्ततापूर्ण स्वभाव को पहले से ज़्यादा स्पष्ट कर दिया है। (MAQ/T)