इस्राईल से अरब देशों के रिश्ते अपवाद नहीं सामान्य प्रक्रिया?!
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हालिया दिनों इस्राईल से अरब देशों के रिश्ते आम बात बन गए हैं हालांकि अरब देशों की जनता में आज भी यही भावना है कि इस्राईल अवैध शासन है जिससे किसी तरह के भी रिश्ते नहीं होने चाहिए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १४, २०१७ १२:२१ Asia/Kolkata
  • इस्राईल से अरब देशों के रिश्ते अपवाद नहीं सामान्य प्रक्रिया?!

हालिया दिनों इस्राईल से अरब देशों के रिश्ते आम बात बन गए हैं हालांकि अरब देशों की जनता में आज भी यही भावना है कि इस्राईल अवैध शासन है जिससे किसी तरह के भी रिश्ते नहीं होने चाहिए।

हाल ही में इस्राईल के जूडो खिलाड़ी को मोरक्को में प्रतियोगिता में भाग लेने का मौक़ा मिला। आयोजकों ने इस्राईली खिलाड़ियों का औपचारिक ड्रेस पहनने की भी अनुमति दी और इस्राईली राष्ट्रगान भी बजाया।

इससे पहले अबू ज़हबी में होने वाली प्रतियोगिता में भी इस खिलाड़ी ने भाग लिया मगर वहां अधिकारियों ने इस्राईली ड्रेस पहनने और इस्राईली राष्ट्रगान बजाने से रोक दिया था। मगर इस्राईली खिलाड़ियों ने आयोजकों को चुनौती देते हुए खुद ही राष्ट्रगान पढ़ा।

खिलाड़ियों के अलावा व्यापारी और उद्यमी भी उन अरब व इस्लामी देशों से व्यापार कर रहे हैं जिनसे इस्राईल के कूटनैतिक संबंध नहीं हैं। फ़ार्स खाड़ी के अरब देश तथा दूसरे भी कुछ मुस्लिम देश हैं जो इन संबंधों को छिपाने की ज़रूरत भी नहीं महसूस करते।

इस्राईली अख़बार जेरुज़लम पोस्ट ने वरिष्ठ इस्राईली उद्यमी एरियल मर्गलेट के हवाले से रिपोर्ट दी कि सऊदी अरब के नियोम नामक प्रोजेक्ट में इस्राईली कंपनियों के लिए पूंजीनिवेश के बहुत अच्छे अवसर हैं।

मर्गलेट ने जो फ़ार्स खाड़ी के कई अरब देशों की यात्रा करते रहते हैं, आगे कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने अपनी योजना के माध्यम से वास्तव में इस्राईलियों को आर्थिक सहयोग की दावत दी है।

उन्होंने फ़ेसबुक पर अपने पेज पर लिखा कि सऊदी अरब और अन्य अरब देशों में एसे अधिकारी मौजूद हैं जिनसे सहयोग किया जा सकता है।

मर्गलेट इस्राईल के हाईटेक उद्यमी हैं, उन्होंने इसी साल राजनीति से सन्यास लिया है। अपने राजनैतिक कैरियर में उन्होंने बड़े पैमाने पर अरब देशों को इस्राईल की हाईटेक परियोजनाओं में शामिल किया है।