सऊदी अरब ने जर्मनी से अपना राजदूत वापस बुलाया
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विशेषज्ञों का मानना है कि जो कुछ क़तर के साथ हुआ अब वही एक प्रकार से लेबनान के साथ हो रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १८, २०१७ १६:१३ Asia/Kolkata

विशेषज्ञों का मानना है कि जो कुछ क़तर के साथ हुआ अब वही एक प्रकार से लेबनान के साथ हो रहा है।

सऊदी अरब लेबनान के प्रधानमंत्री सअद हरीरी के साथ जो व्यवहार कर रहा है उसके खिलाफ जर्मनी के विदेशमंत्री ज़िग्मार गैब्रिएल ने जो हालिया बयान दिया है उससे खिन्न होकर सऊदी अरब ने शनिवार की सुबह बर्लिन से अपने राजदूत को वापस बुला लिया। जर्मनी के विदेशमंत्री ने गुरूवार को सऊदी अरब की आलोचना करते हुए रियाज़ के कदम को अप्रचलित बताया था।

जानकार हल्कों का मानना है कि सऊदी अरब के दबाव में लेबनान के प्रधानमंत्री सअद हरीरी ने अपने पद से त्याग पत्र दिया है और इससे सऊदी अरब का लक्ष्य लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह को आघात पहुंचाना था।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों व अधिकारों के विशेषज्ञ बल देकर कह रहे हैं कि सऊदी अरब को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना चाहिये था। इसी प्रकार इन विशेषज्ञों का मानना है कि जो कुछ क़तर के साथ हुआ अब वही एक प्रकार से लेबनान के साथ हो रहा है। दूसरे शब्दों में सऊदी अरब लेबनान को अपने आधिपत्य व वर्चस्व में करना चाहता है।

क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन इस बात के सूचक हैं कि सऊदी अरब ने क्षेत्र के छोटे देशों के खिलाफ जो कार्यवाहियां की हैं उसका लक्ष्य क्षेत्र के देशों को रियाज़ की नीतियों के अनुसरण के लिए बाध्य करना है। क़तर के साथ सऊदी अरब के वर्चस्ववादी रवइये को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

इसी प्रकार लेबनान के प्रधानमंत्री सअद हरीरी के साथ सऊदी अरब के क्रिया- कलापों को लेकर अंतरराष्ट्रीय हल्कों में रियाज़ की आलोचना में वृद्धि हो गयी है।

बहरहाल जर्मनी के विदेशमंत्री द्वारा सऊदी अरब के क्रिया- कलापों की आलोचना और रूस द्वारा लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह की उपस्थिति के जारी रहने की आवश्कयता पर बल, एक बार फिर सऊदी अरब की विदेश नीति की विफलता का परिचायक है। MM