ईरान से जंग का ढोल पीट रहा है सऊदी अरब
इस्लामी जगत और क्षेत्र की प्रभावशाली शक्ति के रूप में ईरान और सऊदी अरब के बीच प्रतिस्पर्धा बहुत पहले से ही चली आर रही है किन्तु हालिया दिनों में इस प्रतिस्पर्धा ने नया रुख़ ही अपना लिया है जिससे पश्चिमी एशिया में युद्ध का बिगुल बज गया है।
यह कहना अभी जल्दी है कि दोनों पक्षों के बीच युद्ध का बिगुल बज चुका है किन्तु यह कहना किसी सीमा तक सही है कि दोनों ओर से शीत युद्ध के नगाड़े बज चुके हैं। शीतयुद्ध दिन प्रतिदिन तेज़ होता चला जा रहा है जबकि दूसरी ओर सत्ता तक पहुंचने के लिए क्राउन प्रिंस अपने विरोधियों का सफ़ाया तेज़ी से जारी रखे हुए हैं।
कुछ टीकाकार तो यहां तक कहने लगे हैं कि मुहम्मद बिन सलमान ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए हैं और वह इसमें किस हद तक सफल हो पाते हैं यह तो समय ही बताएगा। दूसरी ओर रियाज़ के किंग ख़ालिद हवाई अड्डे पर यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों मीज़ाइल हमले के बाद सऊदी अरब के अधिकारियों ने सीधे ईरान को सैन्य हमले की धमकी देना शुरु कर दिया।
इसी बीच सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन पर हमला करने वाले सऊदी गठबंधन ने 6 अक्तूबर को एक बयान जारी करके इस हमले को देश के विरुद्ध ईरान द्वारा युद्ध की घोषणा बताया और कहा कि तेहरान से इसका बदला लिया जाएगा। सऊदी अरब की इस कार्यवाही को टीकाकार एलाने जंग बता रहे हैं। मामला यहीं पर समाप्त नहीं हुआ अब सऊदी अरब के अधिकारियों ने दबाव का दूसरा रास्ता अपना और हिज़्बुल्लाह पर दबाव डालने के लिए उन्होंने लेबनान के प्रधानमंत्री साद हरीरी को रियाज़ बुलाकर उनसे ज़बरदस्ती त्याग पत्र ले लिया। अब सवाल यह पैदा होता है कि ईरान से मुक़ाबले के लिए सऊदी अधिकारी किस हद तक जा सकते हैं और क्या मुहम्मद बिन सलमान की टीम इस मामले में ईरान से सैन्य टकराव के लिए तैयार है?
यहां पर इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि पश्चिमी एशिया क्षेत्र का समीकरण बुरी तरह ख़राब हो चुका है और यह परिवर्तन ईरान और प्रतिरोध के मोर्चे के हित में जबकि सऊदी अरब और उसके घटकों के नुक़सान में आगे बढ़ रहे हैं। सऊदी अरब को यह आशा था कि सीरिया में बश्शार असद की सरकार के गिरने और यमन में जल्दी से विजय हासिल करके वह ईरान पर दबाव डालना शुरु कर देगा किन्तु सीरिया के विभिन्न क्षेत्रों से आतंकवादियों को खदेड़ने में ईरान, रूस और दमिश्क़ के घटकों की विजय और यमन युद्ध के लंबा खिंचने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब के क्रियाक्लापों की आलोचना तथा इराक़ में आतंकियों की पराजय तथा सेना और स्वयं सेवी बलों की विजय ने यह सिद्ध कर दिया कि क्षेत्रीय समीकरण सऊदी अरब के नहीं बल्कि ईरान के हित में आगे बढ़ रहे हैं और सऊदी अरब ईरान के विरुद्ध एक नया मोर्चा खोलने की स्थिति में नहीं है जबकि सऊदी अरब और उसके पश्चिमी समर्थकों द्ववारा प्राक्सी वाॅर छेड़े जाने के बाद से ईरान ने सीरिया, इराक़, यमन और लेबनन में सऊदी अरब और उसके घटकों को धूल चटाई है। (AK)