सऊदी अरब ने क़ाहेरा में ईरानी विरोधी बैठक की
सऊदी अरब जिस तरह से ईरान विरोधी गतिविधियां अंजाम दे रहा है वह क्षेत्र में सऊदी अरब की आक्रमक नीतियों की सूचक है।
सऊदी अरब के आह्वान पर अरब देशों के विदेशमंत्रियों ने 19 नवंबर को मिस्र की राजधानी काहेरा में अपात बैठक की। इस बैठक में अरब देशों के अनुसार ईरान द्वारा अरब देशों की शांति व सुरक्षा में विघ्न उत्पन्न करने के लिए किये जाने वाले प्रयासों की समीक्षा की गयी।
सऊदी अरब के निर्देश पर अरब संघ के विदेशमंत्रियों की बैठक की समाप्ति पर जो विज्ञप्ति जारी की गयी उसमें ईरान पर क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया।
सऊदी अरब जिस तरह से ईरान विरोधी गतिविधियां अंजाम दे रहा है वह क्षेत्र में सऊदी अरब की आक्रमक नीतियों की सूचक है। ईरान के विरुद्ध सऊदी अरब की जो आक्रामक नीतियां हैं उसकी समीक्षा ईरान विरोधी अमेरिकी और इस्राईली नीतियों के परिप्रेक्ष्य में करना चाहिये।
अमेरिकी बुद्धिजीवी और विश्लेषक नोअम चामस्की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सबसे पहली सऊदी यात्रा और उसके प्रभावों के संबंध में कहते हैं" सऊदी अरब का वह स्थान है कि जब ट्रम्प सऊदी अरब गये थे तो वह यह आभास कर रहे थे कि वह अपने घर में हैं।
उन्होंने इस यात्रा में एक तानाशाह, रक्तपिपासु, कड़ाई से दमन करने वाले, बहुत बड़े तेल पैदा करने वाले और बहुत अधिक पैसे वाले से हथियारों की बिक्री के संबंध में बहुत बड़े समझौते किये।
उनकी यात्रा का एक परिणाम था कि उन्होंने यमन पर सऊदी अरब के पाश्विक हमलों में वृद्धि के लिए हरी झंडी दिखाई। इसी तरह सऊदी अरब ने कतर के खिलाफ जो कुछ किया और कर रहा है उसके लिए भी उन्होंने सऊदी अरब को हरी झंडी दिखाई।
स्पष्ट है कि मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद सऊदी अरब क्षेत्र पर अपना वर्चस्व जमाने का स्वप्न देख रहा है परंतु अभी सीरिया, इराक और लेबनान में मिलने वाली विफलताओं के बाद सऊदी अरब को समस्याओं का सामना है। इसी कारण सऊदी अरब क्षेत्रीय संकटों को फैला कर अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की चेष्टा में है। MM