फ़ार्स खाड़ी में यूएई और अमरीका की जासूसी नेटवर्क की तय्यारी
अमरीकी पत्रिका फ़ॉरेन पॉलिसी ने एक समीक्षा में जिसका शीर्षक "फ़ार्स खाड़ी में जासूसी का साम्राज्य बनाने के लिए यूएई की ओर से सीआईए के पूर्व अधिकारियों को पैसे" है, इस संदर्भ में अमरीका की ओर से व्यापक सहयोग की सूचना दी है।
इस लेख में आया है कि पश्चिमी देशों और ख़ास तौर पर अमरीकी विशेषज्ञ अबू ज़हबी में ज़ायद बंदरगाह के निकट एक इलाक़े में यूएई की फ़ोर्सेज़ को जासूसी के नए उपकरणों के इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
यूएई अपनी ऊंची उड़ान के तहत यमन की अदन खाड़ी में स्थित सुक़ुतरा और मुयून द्वीपों पर पूरी तरह क़ब्ज़ा करने और अपने जासूसी नेटवर्क को क्षेत्र में फैलाने के चक्कर में है। इसके अलावा हालिया वर्षों में उसने अमरीका और ज़ायोनी शासन की फूट डालने की नीति के प्रभाव में आकर फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र में अपनी भूमि के बारे में निराधार दावे किए।
कुल मिलाकर यह कि संयुक्त अरब इमारात ने अपने सैन्य, आर्थिक व सुरक्षा ढांचे में पश्चिमी देशों और ख़ास तौर पर अमरीका और ज़ायोनी शासन को खुली छूट देकर क्षेत्र के हालात में प्रभाव डालने की दिशा में क़दम उठाया है और वास्तव में उसका यह क़दम अमरीका और ज़ायोनी शासन की वर्चस्ववादी नीति के परिप्रेक्ष्य में है। यह ऐसा विषय है जिसकी यूएई सहित क्षेत्रीय जनमत ने आलोचना की है।
अमरीका अपनी वर्चस्ववादी साज़िशों में अरब देशों और ख़ास तौर पर फ़ार्स खाड़ी के देशों को अपने साथ मिलाकर क्षेत्र में अपनी सैन्य व जासूसी गतिविधियों के भारी ख़र्च को अरब देशों पर थोपना चाहता है। जैसा कि इस लक्ष्य के लिए वह हमेशा फ़ार्स खाड़ी के तटवर्ती देशों को हथियार व जासूसी उपकरण बेचता है और वह विभिन्न बहानों से इस क्षेत्र मे अपने सैन्य व जासूसी ठिकानों को बाक़ी रखने और उसमें विस्तार की कोशिश में रहता है। (MAQ/T)