बहरैनी जनता के लिए 2017 कैसा रहा
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बहरैन के सबसे बड़े विपक्षी दल अलवेफ़ाक़ ने एक बयान में 2017 को सुरक्षा और विरोधियों के दमन की नज़र से बहरैनियों के लिए सबसे बुरा साल कहा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०२, २०१८ १२:५९ Asia/Kolkata

बहरैन के सबसे बड़े विपक्षी दल अलवेफ़ाक़ ने एक बयान में 2017 को सुरक्षा और विरोधियों के दमन की नज़र से बहरैनियों के लिए सबसे बुरा साल कहा।

2017 में बहरैन में सामूहिक रूप से लोगों को फांसी सुनाने की कई घटना घटी, लगभग 1000 राजनैतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया और 150 नागरिकों की नागरिकता ख़त्म की गयी।

 रिपोर्टें दर्शाती हैं कि बहरैनी जनता को 2017 में आले ख़लीफ़ा शासन की दमनकारी कार्यवाहियों का उसी तरह सामना रहा जिस तरह 2017 से पहले के वर्षों में उसे सामना था। बहरैनी जनता ने ऐसी हालत में 2018 का स्वागत किया है कि आले ख़लीफ़ा शासन विश्व समुदाय की ख़ामोशी और पश्चिमी सरकारों में ख़ास तौर पर अमरीका की ओर से व्यापक समर्थन की आड़ में बहरैनी जनता के और बड़े स्तर पर दमन की तय्यारी कर रहा है।          

इस बारे में पश्चिम एशिया मामलों के ब्रितानी माहिर मार्क जोन्ज़ का कहना है कि ट्रम्प की ओर से फ़ार्स खाड़ी की अरब सरकारों को समर्थन के कारण ये सरकारें अपने यहां विरोधियों के आंदोलन को और बुरी तरह कुचलेंगी। जोन्ज़ का कहना है कि ट्रम्प की बहरैनी और सऊदी शासन से दोस्ती इन शासनों को और अतिक्रमण के लिए उकसाएगी।

बहरैन में राजनैतिक कार्यकर्ताओं की व्यापक स्तर पर गिरफ़्तारी और उन्हें फांसी सहित दूसरे कठोर दंड सुनाना विश्व मानवाधिकार घोषणापत्र के दसवें अनुच्छेद तथा नागरिक व राजनैतिक विशेषाधिकार संधि के छठे अनुच्छेद के ख़िलाफ़ है। इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय कन्वेन्शनों में नागरिकता ख़त्म करने की भी भर्त्सना की गयी है। मिसाल के तौर पर विश्व मानवाधिकार घोषणापत्र के पंद्रहवें अनुच्छेद में आया है कि सभी लोग नागरिकता के अधिकार से संपन्न हैं और किसी को भी मनमाने ढंग से नागरिकता से वंचित नहीं किया जा सकता।

आले ख़लीफ़ा शासन बहरैन में हर तरह का हथकंडा अपना रहा है ताकि जनांदोलन को नियंत्रित करे और विरोधियों को विभिन्न तरीक़ों से राजनैतिक व सामाजिक मंच से पूरी तरह ख़त्म कर दे। (MAQ/T)