फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध इस्राईल का एक नया षडयंत्र
इस्राईल की संसद ने शहादत प्रेमी कार्यवाही करने वाले फ़िलिस्तीनियों के लिए मृत्युदंड का क़ानून बनाया है जिसकी कड़ी आलोचना की जा रही है।
इस्राईल की संसद क्नेसेट में एक बुधवार को एक क़ानून पेश किया गया जिसके आधार पर शहादत प्रेमी कार्यवाही करने वाले फ़िलिस्तीनियों को मौत की सज़ा दी जाएगी। इसके पक्ष में 52 वोट डाले गए जबकि विरोध में 42 मत पड़े।
6 दिसंबर 2017 को ट्रम्प की ओर से अमरीकी दूतावास को तेलअवीव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने के फैसले के बाद फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध इस्राईल की यह तीसरी शत्रुतापूर्ण कार्यवाही है। इस्राईल का नया क़ानून क्षेत्र में हिंसा को बढ़ावा देगा। इस क़ानून को इस्राईल के पूर्व युद्धमंत्री लेबरमेन की पार्टी "इस्राईल बीतना" ने क्नेसेट में पेश किया है।इस्राईल की ओर से यह कहा जा रहा है कि इस क़ानून के बनाने का मुख्य उद्देश्य, फ़िलिस्तीनियों की शहादत प्रेमी कार्यवाहियों को रोकना है। फ़िलिस्तीन मामलों के जानकारों का कहना है कि इस्राईल का नया क़ानून न केवल यह कि फिलिस्तीनियों के शहादत प्रेमी जज़्बे को रोक नहीं सकेगा बल्कि इस्राईल के विरुद्ध जनान्दोलन इन्तेफ़ाज़ा को और अधिक तेज़ कर देगा।
निश्चित रूप से यह बात कही जा सकती है कि अत्याचारग्रस्त फ़िलिस्तीनी, शहादत प्रेमी कार्यवाही के माध्यम से फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की सुरक्षा करते हैं। यह वह सुरक्षा है जिसका अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को है तथा राष्ट्रसंघ के चार्टर में भी इस का उल्लेख मिलता है। फ़िलिस्तीनी, एक अत्याचारी और अतिक्रमणारी शासन के मुक़ाबले में अपने राष्ट्र और अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं। इस्राईल की संसद में पेश किया गया नया बिल, फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध इस्राईल के सुनियोजित और सरकारी आतंकवाद को स्पष्ट करता है। यही कारण है कि फ़िलिस्तीन के विदेशमंत्री ने इस क़ानून को आतंकवाद की संज्ञा देते हुए कहा है कि इसके ख़रनाक परिणाम सामने आएंगे। इस्राईल के इस नए क़ानून के अत्याचारपूर्ण होने का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके पारित होते ही यूरोपीय संघ ने अपमानजनक बताते हुए मानवता के विरुद्ध बताया है।