बहरैन, सुरक्षा बलों ने शैख़ ईसा क़ासिम के घर को घेरा
बहरैन की अपील कोर्ट द्वारा वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता ख़त्म करने और उन्हें 1 साल क़ैद में रखने के आदेश की पुष्टि के बाद बहरैनी सुरक्षा बलों ने दुराज़ क्षेत्र में शैख़ ईसा क़ासिम के घर की निगरानी बढ़ा दी और घर के चारों ओर भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया।
हमारे संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार बहरैनी सुरक्षा बलों ने मंगलवार को अपील कोर्ट का आदेश एक दिन बाद शैख़ ईसा क़ासिम के परिजनों के हवाले किया।
बहरैन की अपील कोर्ट के आदेश में आया है कि वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम को सुनाई गयी एक साल ही सज़ा और उनके ऊपर तथा उनके कार्यालय में काम करने वाले दो लोगों पर लगाए गये जुर्माना की न्यायालय पुष्टि करता है।
आले ख़लीफ़ा शासन ने यह क़दम ऐसी स्थिति में उठाया है कि अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस शासन से इस बात की मांग कर रहे हैं कि शैख़ ईसा क़ासिम का एलाज सामान्य तरीक़े से होना चाहिए।
आले ख़लीफ़ा शासन ने शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता ख़त्म कर दी और उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही करते हुए उन्हें जून 2016 से देराज़ इलाक़े में नज़रबंद कर रखा है।
ज्ञात रहे कि बहरैन के न्यायालय ने निराधार आरोप के आधार पर वरिष्ठ धर्मगुरू शेख ईसा क़ासिम को एक साल की सज़ा सुनाते हुए उनकी संपत्ति को ज़ब्त करने का भी आदेश दिया था। न्यायालय के इस आदेश के बाद बहरैनी सुरक्षाबलों ने इस देश की राजधानी मनामा के अद्देराज़ क्षेत्र में शेख ईसा क़ासिम के घर पर हमला कर दिया था जिसमें कम से कम 6 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए। इस संबन्ध में सुरक्षाबलों ने लगभग 300 लोगों को गिरफ़्तार किया है।
बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 से इस देश में अत्याचारी शासन के ख़िलाफ़ जनता का प्रदर्शन जारी है। आले ख़लीफ़ा शासन ने जनता के विरोध को दबाने के लिए विपक्ष के बहुत से नेताओं को गिरफ़्तार और उनके ख़िलाफ़ झूठे केस बनाकर उन्हें लंबी अवधि की क़ैद की सज़ा दी है या उन्हें घर में क़ैद कर दिया है। (AK)