सीरिया की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए
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तुर्की की रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी के प्रमुख ने इस देश के राष्ट्रपति से मांग की है कि वे सीरिया में हर प्रकार के रक्तपात से बचने के लिए दमिश्क़ से तत्काल संपर्क स्थापित करें।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०४, २०१८ ११:५८ Asia/Kolkata
  • सीरिया की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए

तुर्की की रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी के प्रमुख ने इस देश के राष्ट्रपति से मांग की है कि वे सीरिया में हर प्रकार के रक्तपात से बचने के लिए दमिश्क़ से तत्काल संपर्क स्थापित करें।

कमाल क़लीचदार ओग़लू ने अंकारा में पार्टी के अधिवेशन को सबोधित करते हुए रजब तैयब अर्दोग़ान से मांग की है कि वे अंकारा और दमिश्क़ के संबन्धों को यथाशीघ्र पहले की तरह सामान्य करें।  उनका यह बयान तुर्की की सत्ताधारी पार्टी की ओर से उत्तरी सीरिया में किये जा रहे सैन्य अभियान के समर्थन के बाद सामने आया है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान तुर्की और सीरिया के संबन्ध बहुत अधिक उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।उत्तरी सीरिया में तुर्की की सैन्य कार्यवाही के कारण इस देश की संसद में विपक्षी दलों के साथ भी सत्ताधारी दल "जस्टिस एवं डेवलेपमेंट पार्टी" के सबन्धों मे तनाव पाया जाता है।  तुर्की के विपक्षी दल, इस देश की वर्तमान नीतियों का हर स्तर पर विरोध कर रहे हैं।  तुर्की के एक सांसद "आयहन बीलगेन" सीरिया के इफ़्रीन नगर में तुर्की की सैन्य कार्यवाही की आलोचना करते हुए कहते हैं कि वहां पर चलाए जा रहे "जै़तून की शाख" नामक अभियान से देश को कोई लाभ नहीं होगा।  उन्होंने कहा कि इससे उल्टे तुर्की को भारी नुक़सान सहन करना होगा।

विशेष बात यह है कि तुर्की की सत्ताधारी पार्टी के घटक दल "सआदत पार्टी" के नेता ने भी इस कार्यवाही की निंदा की है।  "बाइरल आइडिन" का कहना है कि अर्दोग़ान की सरकार देश के भीतर और बाहर दोनो स्तरों पर विफल रही है।  तुर्की के इस नेता ने कहा है कि "जस्टिस एवं डेवलेपमेंट पार्टी" ने देश को पटरी से उतार दिया है और वह कूटनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सैनिक हर क्षेत्र में विफल रही है।  सआदत पार्टी के एक अन्य नेता ने तुर्की की ओर से सीरिया और इराक़ युद्ध में हस्तक्षेप तथा दाइश सहित आतंकवादी गुटों के समर्थन के बारे में कहा है कि तुर्की की सरकार को इसकी भरपाई करनी होगी।

तुर्की के विभिन्न दलों की ओर से इस देश के सत्ताधारी दल की नीतियों के विरोध से एेसा नहीं लगता कि उत्तरी सीरिया में सैन्य अभियान से अंकारा को अपने दृष्टिगत लक्ष्य प्राप्त हो जाएंगे।  उधर सीरिया की भूमि पर कुछ सैन्य कार्यवाहियां करने के कारण एेसा प्रतीत नहीं होता कि तुर्की और सीरिया के संबन्ध निकट भविष्य में सामान्य हो पाएंगे।