इराक़ पुनर्निमाण की अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस, अपेक्षाएं और सतर्कताएं
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इराक़ के पुनर्निमाण का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को कुवैत में आरंभ हुआ और यह सम्मेलन बुधवार तक जारी रहेगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb १३, २०१८ १२:३२ Asia/Kolkata

इराक़ के पुनर्निमाण का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को कुवैत में आरंभ हुआ और यह सम्मेलन बुधवार तक जारी रहेगा।

इस सम्मेलन में 70 से अधिक देशों और विभिन्न देशों की लभगग 2000 कंपनियों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कुवैत सम्मेलन, इराक़ के पुनर्निमाण के संदर्भ में विश्व समुदाय की ज़िम्मेदारी पर एक प्रकार से पुनः बल दिया जाना है। आशा की जा रही है कि इस सम्मेलन के दौरान, विभिन्न देश और कंपनियां इराक़ विशेषकर उसके युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पुंजीनिवेश में रूचि लेंगीं। इराक़ी सूत्रों के अनुसार इस देश को पुनर्निमाण के लिए कम से कम 88 अरब 200 मिलयन डॅालर की आवश्यकता है। यहां पर ध्यान देने की बात यह है कि इराक़ में जो तबाही हुई है वह केवल आतंकवादी गुटों की कार्यवाहियों का ही नतीजा नहीं है बल्कि इस बर्बादी में वह देश भी शामिल हैं जो इराक़ में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के दावे के साथ सक्रिय रहे हैं।

 

आंकड़ों के अनुसार अमरीका और उसके गठबंधन ने इराक़ के मूल ढांचे को बहुत नुक़सान पहुंचाया है और इस की पुष्टि, वाॅल स्ट्रीट जरनल ने अपनी हालिया एक रिपोर्ट में भी की है। रिपोर्टों के अनुसार अमरीकी गठबंधन  ने इराक़ को कम से कम 45 अरब डॅालर का नुक़सान किया है। इस तरह से हम देखते हैं कि इराक़ की बर्बादी का अस्ल ज़िम्मेदार अमरीका है क्योंकि इराक़ को या तो आतंकवादी गुट दाइश ने बर्बाद किया या फिर अमरीकी गठबंधन ने और दाइश को अमरीका द्वारा बनाए जाने की बात तो खुद अमरीकी नेताओं ने स्वीकार की है। 

इराक़ से दाइश के अंत में स्वंय सेवी बल की मुख्य भूमिका 

 

इराक़ के पुनर्निमाण में एक अहम बात यह है कि पुनर्निमाण को, इराक़ पर दबाव डालने या उसे ब्लैकमेल करने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए एेसा इस लिए कहा जा रहा है क्योंकि सऊदी अरब ने इराक़ के पुनर्निमाण में अपनी भागीदारी के लिए यह शर्त पेश की है कि इराक़, ईरान से दूरी बनाए और क़तर पर आर्थिक प्रतिबंध में शामिल हो। अमरीका और तुर्की ने भी इराक़ के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। कुछ  देशों ने इराक़ के पुनर्निमाण में हिस्सा लेने के लिए यह शर्त रखी है कि इराक़ सरकार, स्वंय सेवी बल " हश्दुश्शाबी " को भंग कर दे। इस प्रकार की शर्तें वास्तव में अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं और इराक़ की अर्थ व्यवस्था में सहयोग का यह तरीक़ा किसी भी दशा में स्वीकारीय नहीं होगा। (Q.A.)