स्वदेशी हथियरों से लड़ेंगे विदेशी से नहींः सऊदी दावा
सऊदी अरब ने फैसला किया है कि वह अब स्वदेशी हथियारों का प्रयोग करेगा विदेशी का नहीं।
पिछले पांच वर्षों के दौरान संसार में सबसे अधिक हथियार आयार करने वाले देश सऊदी अरब ने अब अपने ही देश में हथियार बनाने का फैसला किया है। सऊदी अरब के एक सैन्य अधिकारी मेजर जरनल "अतिया अलमारेकी" ने "Attack of 2018" नामक एक हथियार प्रदर्शनी में कहा है कि उनके देश ने स्वदेशी हथियार बनाने के उद्देश्य से विदेशी हथियार कंपनियों से समझौते किये हैं। इस सऊदी सैन्य अधिकारी ने विदेशी कंपनियों के साथ किये जाने वाले समझौते की रक़म या अन्य बातों के बारे में चर्चा नहीं की।
इंटरनैश्नल पीस इन्सटीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 वर्षों के दौरान सऊदी अरब ने बड़ी संख्या में हथियारों का आयात किया है। इस दौरान उसने पिछले वर्षों की तुलना में 212 बराबर हथियार ख़रीदे हैं। जब से शाह सलमान ने सऊदी अरब की बागडोर संभाली है उस समय से इस देश की ओर से हथियार ख़रीदने में तेज़ी से वृद्धि हुई है। इस बात के क्षेत्र पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं। विशेष बात यह है कि सऊदी अरब की ओर से अरबों डाॅलर के हथियार ख़रीदने के कारण सऊदी अरब को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जिससे इस देश की जनता परेशान है। यही विषय, सऊदी अरब के बजट घाटे का भी कारण बना है। अपने देश के नेताओं की इस नीति का सऊदी नागरिक विरोध कर रहे हैं।
ब्लोमबर्ग की वेबसाइट पर लिखा है कि सऊदी अरब, लंबे समय से पश्चिम विशेषकर अमरीकी हथियारों का सबसे बड़ा ग्राहक रहा है। अब सऊदी अरब के 32 वर्षीय युवराज का फैसला है कि 2030 के विज़न के अन्तर्गत उनका देश, शस्त्रों के निर्माण में आत्मनिर्भर हो जाए। एेसे में उसे पश्चिम की हथियार कंपनियों की ज़रूरत होगी।
जानकारों का कहना है कि आले सऊद शासन ने जो नई नीति अपनाई है उससे वह किसी स्थिति में हथियार बनाने के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं हो सकता बल्कि वह अधिक से अधिक पश्चिम पर निर्भर होगा। क्षेत्रीय परिवर्तनों से यह बात समझ में आती है कि सऊदी अरब इस प्रकार के प्रचारिक कामों से अपनी विफलता को नहीं छिपा सकता जिसका स्पष्ट उदाहरण यमन में सऊदी अरब की खुली पराजय है।