बहरैन में आले ख़लीफ़ शासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी हैं
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शनिवार की रात बहरैन के अधिकांश इलाक़ों में लोगों ने आले ख़लीफ़ा सरकार की दमनकारी नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए। अलविफ़ाक़ इस्लामी पार्टी का कहना है कि वर्ष 2018 की शुरूआत से अब तक देश में आले ख़लीफ़ा तानाशाही व्यवस्था के ख़िलाफ़, 1000 प्रदर्शन हो चुके हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १८, २०१८ १५:३८ Asia/Kolkata
  • बहरैन में आले ख़लीफ़ शासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी हैं

शनिवार की रात बहरैन के अधिकांश इलाक़ों में लोगों ने आले ख़लीफ़ा सरकार की दमनकारी नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए। अलविफ़ाक़ इस्लामी पार्टी का कहना है कि वर्ष 2018 की शुरूआत से अब तक देश में आले ख़लीफ़ा तानाशाही व्यवस्था के ख़िलाफ़, 1000 प्रदर्शन हो चुके हैं।

बहरैनी शासन की दमनकारी नीतियों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचारों के बावजूद, बहरैनी जनता का आंदोलन जारी है। बहरैन के घटनाक्रमों को देखते हुए यह बात पूरे विश्वास से कही जा सकती है कि बहरैनी जनता अपने मूल अधिकारों की प्राप्ति तक आंदोलन जारी रखेगी और उसे दबाया नहीं जा सकता।

बहरैन में 14 फ़रवरी 2011 से  देश में तानाशाही शासन के ख़िलाफ़ जनांदोलन जारी है। बहरैनी जनता, आज़ादी और लोकतंत्र की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है। हालांकि आले ख़लीफ़ा सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज़ ताक़त के बल पर बंद करना चाह रही है।

बहरैन में देश के समस्त स्रोतों पर एक परिवार का ही एकाधिकार है, जो मनमाहे ढंग से उन्हें लूट रहा है। यह शासन अपने विरोधियों को जेलों में क़ैद करके तरह तरह की यातनाएं देता है और उनकी नागरिकता तक भंग कर देता है।

आले ख़लीफ़ा शासन की इन कार्यवाहियों से न केवल बहरैनी जनता का आंदलोन कमज़ोर नहीं पड़ा, बल्कि उसमें और अधिक तेज़ी आ गई है। बहरैनी जनता का कहना है कि अपनी मांगों के पूरा होने तक उसका यह शांतिपूर्ण आंदलोन इसी तरह से जारी रहेगा।