अर्दोग़ान-नेतनयाहू के बीच वाक युद्ध तेज़ हुआ
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फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के ताज़ा अपराध की तुर्क राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान द्वारा आलोचना के बाद, अब उनके और ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr ०२, २०१८ ०६:४६ Asia/Kolkata
  • अर्दोग़ान-नेतनयाहू के बीच वाक युद्ध तेज़ हुआ

फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के ताज़ा अपराध की तुर्क राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान द्वारा आलोचना के बाद, अब उनके और ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है।

समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार, अर्दोग़ान ने ज़ायोनी प्रधान मंत्री के "भूमि दिवस" पर फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार को सही ठहराने पर आधारित बयान और  तुर्क सेना की उनके द्वारा आलोचना की प्रतिक्रिया में कहा कि नेतनयाहू एक ऐसा कमज़ोर आतंकी है जिसकी परमाणु हथियार भी कोई मदद नहीं कर सकता।

तुर्क राष्ट्रपति ने कहा कि इस्राईली सेना के अत्याचार की व्याख्या करने की ज़रूरत ही नहीं रह गयी है क्योंकि ज़ायोनी शासन के ग़ज़्ज़ा पट्टी और बैतुल मुक़द्दस में अपराध किसी से छिपे नहीं हैं।

अर्दोग़ान ने ग़ज़्ज़ा की समा पर शुक्रवार को इस्राईली सेना के हाथों फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार की शनिवार को भर्त्सना करते हुए अमरीका से मांग की कि वह इस्राईल के हाथों फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार को रुकवाए।

ज़ायोनी प्रधान मंत्री ने अर्दोग़ान के बयान की प्रतिक्रिया में कहा, "जो व्यक्ति वर्षों से आम लोगों पर बमबारी कर रहा हो वह दूसरों को नैतिकता का पाठ देने की पोज़ीशन में नहीं है।"

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को फ़िलिस्तीनियों की "वतन वापसी के अधिकार" नामक रैली पर कि जिसमें 10000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनियों ने भाग लिया, इस्राईली सैनिकों के हमले में कम से कम 17 फ़िलिस्तीनी शहीद और 1400 से ज़्यादा घायल हुए।

ज़ायोनी शासन ने मार्च 1976 को फ़िलिस्तीनियों की हज़ारों हेक्टर ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया जिससे पूरे फ़िलिस्तीन में नागरिकों का आक्रोश फूट पड़ा था। फ़िलिस्तीनी जनता 1976 से अब तक 30 मार्च को "भूमि दिवस" के रूप में मनाती है।(MAQ/N)