बहरैन, जनता का दमन और आले ख़लीफ़ा शासन की नीतियां
बहरैनी सुरक्षा बलों ने सीरिया पर अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन की सैन्य कार्यवाही का विरोध करने वाले बहरैनी प्रदर्शनकारियों का भरपूर दमन किया और उन पर लठियां बरसायीं और आंसू गैस के गोले फ़ायर किए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने इसी प्रकार बहरैन की जेल में बंद राजनैतिक बंदियों की स्वतंत्रता के समर्थन में नारे लगाए। यह एेसी स्थिति में है कि बहरैन की विभिन्न पार्टियों और दलों ने देश के वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम घर का परिवेष्टन कड़ा किए जाने की निंदा की क्योंकि सुरक्षा बलों ने शैख़ ईसा क़ासिम के घर के चारों ओर दीवारें खड़ी कर दी हैं।
आले ख़लीफ़ा शासन के सैनिकों ने सीमेंट की दीवार खड़ी करके शैख़ ईसा क़ासिम के घर को बंद कर दिया और उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं।
बहरैन में विभिन्न वर्गों विशेषकर शीया मुसलमानों का दमन व्यापक स्तर पर जारी है और इस देश के नागरिकों को किनारे लगाने, मतभेद, दमन और परिवेष्टन में तेज़ी आ गयी है।
बहरैन की जनता ने 14 फ़रवरी 2011 से देश में लोकतंत्र की बहाली और देश से भेदभाव की समाप्ति के लिए प्रदर्शन कर रही है। देश की जनता यह मांग कर रही है कि देश में स्वतंत्र सरकार का गठन हो जो विदेश पर निर्भर न हो।
दुनिया भर की विभिन्न लोकतांत्रिक व मानवाधिकार संगठनों ने बहरैन की जेलों की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। इन संस्थाओं ने इसी प्रकार देश में मृत्युदंड पर भी चिंता जताई है।
बहरहाल बहरैन की सरकार विश्व समुदाय की चुप्पी की छाया में नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन कर रही है और इस कार्यवाही ने इस शासन को और अधिक दुस्साहसी बना दिया है। (AK)